नई दिल्लीः हाल ही में आई एक रिसर्च के मुताबिक, मीनोपोज के बाद जो महिलाएं हार्मोन थेरेपी लेती हैं उनमें हियरिंग लॉस होने का खतरा बढ़ जाता है. हियरिंग लॉस कम करने के बजाय ये थेरेपी लंबे समय तक इस्तेमाल करने से ये खतरा होता है.

क्यों की गई रिसर्च- रिसर्च पहले आई रिसर्च को ध्यान में रखकर की गई. पहले आई रिसर्च में कहा गया कि मीनोपोज शायद हियरिंग लॉस बढ़ा देता है. रिसर्च में कहा गया कि एस्ट्रोजन लेवल कम होने और पोस्टमेन्स्ट्रुअल हार्मोन थेरेनी करवाने के कारण हियरिंग लॉस बढ़ जाता है. क्या कहती हैं एक्सपर्ट- बोस्टोन की ब्रिंहघम एंड वूमेंस हॉस्पिटल की डॉ. और लीड ऑर्थर शैरोन कुरहान का कहना है कि सेक्स हार्मोन और हियरिंग के बीच क्या संबंध है ये खुलासा नहीं हो पाया है लेकिन ये रिसर्च बताती हैं कि जो महिलाएं ओल्ड ऐज में नैचुरली मीनोपोज से गुजरती हैं उनमें हियरिंग लॉस अधिक देखा गया है. शैरोन आगे कहती हैं कि लंबे समय तक पोस्टचमीनोपोज हार्मोन थेरेपी करवाने वाली महिलाओं को थेरेपी के फायदों के अलावा उसके साइड इफेक्टट को भी आंकना चाहिए. कैसे की गई रिसर्च- इस रिसर्च के लिए 1991-2013 के बीच नर्स हेल्थ स्टडी II की 80,972 महिलाओं को शामिल किया गया. जिसमें पाया गया कि 23% महिलाओं में मीनोपोज हार्मोन थेरेपी लेने से हियरिंग लॉस बढ़ गया. 'मीनोपोजः द जर्नल ऑफ द नॉ‍र्थ अमेरिकन मीनोपोज सोसाइटी' में पब्लिश इस रिसर्च में पाया गया कि ना सिर्फ हार्मोन थेरेपी से हियरिंग लॉस होता है बल्कि जिन महिलाओं को बढ़ती उम्र में नैचुरली मीनोपोज होता है उनमें भी हियरिंग लॉस बढ़ सकता है.