नयी दिल्ली: भारत समेत दक्षिण एशियाई देश जिका और इबोला जैसी उभरती संक्रामक बीमारियों के प्रति संवेदनशील हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए उनकी तैयारियों का स्तर ‘अपर्याप्त’ है. एक नए विश्लेषण में आज यह बात कही गई.
अपर्याप्त निगरानी और असमान स्वास्थ्य प्रणाली क्षमता क्षेत्र में उभरती संक्रामक बीमारियों के प्रसार को तेज कर सकती है. यह क्षेत्र तपेदिक, एचआईवी और मलेरिया जैसी बीमारियों के बोझ से पहले ही दबा है.
यह बात ब्रिटिश मेडिकल जर्नल बीएमजे में प्रकाशित दक्षिण एशिया में स्वास्थ्य पर 12 विश्लेषणों के संग्रह के हिस्से के तहत विश्लेषण में कही गई है.
विश्लेषण में इस बात को रेखांकित किया गया है कि 1960 के दशक में कई दक्षिण एशियाई देशों में डेंगू के संक्रमण के छिटपुट मामले देखे गए, लेकिन नियमित महामारी 1990 के दशक की शुरूआत में भारत और श्रीलंका में देखी गई.
विश्लेषण में कहा गया है, ‘‘भारत और श्रीलंका में 40 वर्ष की आयु तक 90 से 95 फीसदी वयस्क डेंगू के विषाणु से प्रभावित हो चुके होते हैं जबकि 41 फीसदी चिकनगुनिया से संक्रमित हो चुके हैं.’’
