- 0-4 अंक: बहुत कम या सामान्य चिंता
- 5-9 अंक: हल्की चिंता
- 10-14 अंक: मध्यम स्तर की चिंता
- 15-21 अंक: गंभीर चिंता
अगर किसी व्यक्ति के 10-14 अंक आते हैं, तो इसे मध्यम स्तर की एंग्जायटी माना जाता है. इस स्थिति में रोज के कामों पर भी असर पड़ सकता है और यह एंग्जायटी डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है. हालांकि, केवल GAD-7 के स्कोर से खुद बीमारी तय नहीं करनी चाहिए.
एंग्जायटी लेवल 3 क्या होता है?
दुनिया में कितने लोग एंग्जायटी से पीड़ित?
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज नाम की एक बड़ी रिसर्च के मुताबिक, दुनिया की करीब 4.05% आबादी यानी लगभग 30 करोड़ 10 लाख लोग एंग्जायटी डिसऑर्डर से पीड़ित हैं. जिन देशों में सबसे ज्यादा लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं उनमें चीन सबसे ऊपर है जहां करीब 4 करोड़ 78 लाख लोग एंग्जायटी से परेशान हैं, उसके बाद भारत का नंबर आता है जहां करीब 4 करोड़ 18 लाख लोग इससे जूझ रहे हैं, फिर अमेरिका, ब्राजील और इंडोनेशिया का नंबर आता है. WHO की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 में दुनिया भर में करीब 35 करोड़ 90 लाख लोगों को एंग्जायटी की समस्या थी, जो कुल आबादी का लगभग 4.4% हिस्सा है.
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भारत और पाकिस्तान में एंग्जायटी की स्थिति
भारत की बात करें तो 2017 में हुई एक बड़ी स्टडी के मुताबिक भारत में करीब 4 करोड़ 49 लाख लोग एंग्जायटी डिसऑर्डर से पीड़ित पाए गए थे, यानी देश की आबादी का लगभग 3.3% हिस्सा. WHO की एक अलग रिपोर्ट में यह आंकड़ा करीब 3 करोड़ 80 लाख बताया गया था. इसके अलावा भारत की नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे के मुताबिक देश की करीब 3.5% आबादी किसी न किसी तरह के तनाव या एंग्जायटी से जूझती है, और यह समस्या सबसे ज्यादा 18 से 29 साल की उम्र के युवाओं में देखी जाती है, साथ ही पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में यह ज्यादा पाई जाती है.
पाकिस्तान में एंग्जायटी को लेकर पूरे देश के स्तर पर कोई बड़ा सरकारी सर्वे अभी तक नहीं हुआ है, इसलिए वहां का सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. लेकिन कराची के एक अस्पताल में हुई एक स्टडी में पाया गया कि वहां आने वाले मरीजों और उनके साथ आए लोगों में से करीब 28.3% लोगों में एंग्जायटी के लक्षण मिले, और यह समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा पाई गई है.
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