वाशिंगटन: कोरोना वायरस के प्रभावी रोकथाम की तलाश में वैज्ञानिकों ने नैनोबॉडी का पता लगाया है. उनका दावा है कि लामा से प्राप्त एंटीबॉडी कोविड-19 के इलाज और रोकथाम की क्षमता रखता है. गौरतलब है कि लामा अमेरिकी ऊंट की प्रजाति का एक जानवर है. ठंडे पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाने वाला खूबसूरत ऊंट सदियों से एंडीज लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा है.

कोविड-19 के इलाज में लामा से प्राप्त नैनोबॉडी हो सकते हैं प्रभावी

अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं के अनुसार, ये विशेष लामा एंटीबॉडी नैनोबॉडी कहलाते हैं और आकार में मनुष्य के एंटीबॉडी से बेहद छोटे होते हैं. गुरुवार को साइंस पत्रिका में प्रकाशित शोध के वरिष्ठ लेखक यी शी ने कहा, 'प्रकृति हमारी सर्वश्रेष्ठ आविष्कारक है.' शोधकर्ताओं ने वॉली नामक काले रंग के लामा को कोरोना वायरस बढ़ाने वाले प्रोटीन के एक टुकड़े के साथ प्रतिरोधी बनाया. उसके करीब दो महीने बाद, इसकी रोग प्रतिरोधक प्रणाली विकसित कर कोरोना वायरस के खिलाफ परिपक्व नैनोबॉडी पैदा किया.

कोरोना वायरस बढ़ाने वाले प्रोटीन के टुकड़े के साथ बनाया गया प्रतिरोधी

मास स्पेक्ट्रोमेट्री आधारित तकनीक का इस्तेमाल करते हुए शोध के प्रमुख लेखक और शी के प्रयोगशाला में अनुसंधान सहायक युफेई शिआंग ने वॉली के रक्त में नैनोबॉडी की पहचान की. उन्होंने बताया कि इसका कोरोना वायरस से गहरा जुड़ाव है. शोधकर्ताओं का कहना है कि ये नैनोबॉडी कोरोना वायरस के लिए सबसे प्रभावी चिकित्सकीय एंटीबॉडी में से कुछ का प्रतिनिधित्व करते हैं. यह एंटीबॉडी कोरोना वायरस के उस प्रोटीन को मजबूती के साथ जकड़ लेती है जो मनुष्य में बीमारी पैदा करता है. इस प्रोटीन को स्पाइक प्रोटीन भी कहा जाता है. वायरस इसी प्रोटीन के चलते ही मानव कोशिका में दाखिल होता है.

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