सर्दियों के मौसम में जब भी हम अपने बिस्तर पर जाते हैं तो अपने पूरे शरीर को रजाई या कंबल से मुंह से लेकर पैरों तक ढक लेते हैं. साथ ही कमरे को पूरी तरह बंद कर हीटर भी चला लेते हैं, ताकि किसी भी तरह की ठंड आप तक न पहुंचे. लेकिन अगर रजाई में ढके रहने और हीटर चलने के बाद भी आपके पैर ठंडे रहते हैं, तो यह चिंता का विषय है.

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अगर आपने पैरों में गर्म जुराबें भी पहन रखी हैं और फिर भी पैर ठंडे हैं, तो यह कई बीमारियों के संकेत हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है. इस लेख के जरिए हम आपको बताएंगे कि आपको किन दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.

ब्लड सर्कुलेशन कमजोर होना

अगर सर्दियों में रजाई या गर्म जुराबें पहनने के बाद भी आपके पैर ठंडे रहते हैं, तो इसका कारण ब्लड सर्कुलेशन हो सकता है. जब पैरों की नसों में खून सही से नहीं पहुंच पाता, तो उस हिस्से में गर्मी नहीं बन पाती. इसी वजह से पैरों में ठंडक बनी रहती है. अगर पैरों में खून का सर्कुलेशन ठीक नहीं है, तो सुन्नपन, दर्द और भारीपन जैसी शिकायतें हो सकती हैं, जो शरीर के लिए खतरनाक हैं.

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खराब कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना

खून में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) की मात्रा बढ़ने पर ठंड से बचाव के बावजूद पैर ठंडे रह सकते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नसों में कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है, जिससे ब्लड का सर्कुलेशन धीमा हो जाता है. सबसे खतरनाक बात यह है कि इसकी जानकारी जल्दी नहीं मिलती. जब नसें ज्यादा ब्लॉक हो जाती हैं, तब जाकर बीमारी के लक्षण दिखते हैं. अगर शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ गया है, तो हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.

डायबिटीज का असर

डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की पैरों की नसें कमजोर हो जाती हैं. इससे खून की नलियां सख्त और संकरी हो जाती हैं. ठंड के मौसम में ये नसें और ज्यादा सिकुड़ जाती हैं. जब पैरों तक पर्याप्त मात्रा में ब्लड का सर्कुलेशन नहीं हो पाता, तो ठंडे पैरों की समस्या शुरू हो जाती है. 

हीमोग्लोबिन की कमी और एनीमिया

अगर खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है, तो एनीमिया जैसी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है. जब शरीर में खून की कमी होती है, तो शरीर पर्याप्त मात्रा में गर्मी नहीं बना पाता. एनीमिया की वजह से शरीर में ठंडक बनी रहती है और कमजोरी, हाथ-पैरों में सुन्नपन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.