हम कई बार देखते हैं कि कुछ बच्चे बड़े होने के बाद भी रात में सोते समय बिस्तर पर पेशाब कर देते हैं. जिससे पेरेंट्स उन्हें डांटते हैं, पर उन्हें शर्मिंदा महसूस कराने की जगह इस समस्या को जानना जरूरी है. इस समस्या को मेडिकल भाषा में नॉक्टर्नल एन्यूरिसिस  कहा जाता है. कई बार बच्चे का शरीर रात में ज्यादा पेशाब बनाता है या उसका मूत्राशय पूरी रात पेशाब रोकने के लिए पूरी तरह विकसित नहीं होता. ऐसे में बच्चे को नींद में पेशाब करने की जरूरत महसूस नहीं होती और बिस्तर गीला हो जाता है. 

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हार्मोन और गहरी नींद वजह

रात में शरीर एक खास हार्मोन बनाता है, जो पेशाब बनने की मात्रा को कम करने में मदद करता है. कुछ बच्चों में इस हार्मोन की मात्रा कम होने के कारण रात में ज्यादा पेशाब बनता है. वहीं, कुछ बच्चे इतनी गहरी नींद में सोते हैं कि मूत्राशय भरने का संकेत मिलने के बाद भी उनकी नींद नहीं खुलती. इसके अलावा, अगर माता-पिता को बचपन में यह समस्या रही है, तो बच्चों में भी इसकी संभावना बढ़ सकती है.

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कब्ज और तनाव को भी न करें नजरअंदाज

कई बार कब्ज की वजह से भी बच्चों को रात में बिस्तर पर पेशाब करने की समस्या होती है. आंतों में मल जमा होने से मूत्राशय पर दबाव पड़ता है, जिससे पेशाब रोकने में परेशानी होती है. इसके अलावा, स्कूल बदलने, परिवार में किसी बड़े बदलाव या मानसिक तनाव के कारण भी यह समस्या दोबारा शुरू हो सकती है.

कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

अगर बच्चा 5 साल की उम्र के बाद भी नियमित रूप से बिस्तर पर पेशाब करता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है. खासकर अगर बच्चा कई महीनों तक रात में बिस्तर गीला नहीं करता था, लेकिन अचानक दोबारा ऐसा होने लगा है तो इसकी वजह जानना जरूरी है. पेशाब करते समय दर्द, बहुत ज्यादा प्यास लगना या दिन में भी बार-बार पेशाब आने जैसे लक्षण हों, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें