Are Chemical-Treated Sweet Potatoes Harmful: शकरकंद एक ऐसा कंद है, जिसे नाश्ते से लेकर डिनर तक किसी भी वक्त खाया जा सकता है. बीते कुछ सालों में यह न्यूट्रिशनिस्ट और डाइटीशियन के बीच काफी लोकप्रिय हुआ है और आम आलू के मुकाबले इसे ज्यादा हेल्दी विकल्प माना जाने लगा है. यही वजह है कि बाजार में शकरकंद की मांग तेजी से बढ़ी है. हालांकि, बढ़ती डिमांड के साथ इसकी मिलावट भी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है.

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फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक, बाजार में बिकने वाले कई शकरकंदों में रोडामाइन बी नामक केमिकल डाई की मिलावट पाई जाती है. यह एक सिंथेटिक रंग है, जिसका इस्तेमाल कपड़ा, कागज, स्याही और लैब से जुड़े कामों में किया जाता है. यह केमिकल खाने योग्य नहीं है और इंसानी सेहत के लिए खतरनाक माना जाता है. एफएसएसएआई  के अनुसार,  रोडामाइन बी का उपयोग खाने की चीजों के प्रोसेसिंग, स्टोरेज या वितरण में पूरी तरह प्रतिबंधित है, क्योंकि यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों और अंगों को नुकसान पहुंचाने का कारण बन सकता है.

घर पर ऐसे करें शकरकंद की शुद्धता की जांच

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एफएसएसएआई  ने शकरकंद की मिलावट पहचानने के लिए एक आसान घरेलू तरीका बताया है. इसके लिए चार आसान स्टेप्स फॉलो किए जा सकते हैं. इसमें सबसे पहले आप एक कॉटन बॉल लें और उसे पानी या किसी वेजिटेबल ऑयल में भिगो लें. उसके बाद शकरकंद लें और उसकी बाहरी सतह को कॉटन बॉल से रगड़ें. अगर शकरकंद शुद्ध है, तो कॉटन बॉल का रंग नहीं बदलेगा. लेकिन अगर कॉटन बॉल का रंग लाल या बैंगनी हो जाए, तो समझ लें कि शकरकंद में मिलावट है.

शकरकंद खाने के फायदे

पोषण के लिहाज से शकरकंद को बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन A पाया जाता है. कई स्टडीज के मुताबिक, शकरकंद में एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे एंथोसाइनिन और कैरोटेनॉयड्स होते हैं, जो शरीर में फ्री रेडिकल्स को खत्म करने में मदद करते हैं. इससे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है और कैंसर, दिल की बीमारियों और डायबिटीज जैसी क्रॉनिक बीमारियों का खतरा घट सकता है. खासकर बैंगनी रंग के शकरकंद ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मददगार माने जाते हैं. उबालकर खाने पर इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम रहता है, जिससे यह ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए बेहतर कार्बोहाइड्रेट विकल्प बन जाते हैं.

इसके अलावा, शकरकंद डायटरी फाइबर से भरपूर होते हैं, जो पाचन को दुरुस्त रखते हैं और आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसमें मौजूद कुछ फाइबर प्रीबायोटिक की तरह काम करते हैं, जिससे कब्ज की समस्या कम होती है और लंबे समय तक गट हेल्थ बेहतर बनी रहती है.

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