Cancer Treatment: कैंसर एक जानलेवा रोग है. केंद्र सरकार की ओर से तंबाकू, सिगरेट व अन्य उत्पाद और अवेयरनेस प्रोग्राम के दौरान लिखा होता है. केंद्र सरकार इसे स्लोगन के तौर पर भी इस्तेमाल करती है. इसके पीछे वजह भी है कि कैंसर का पता आमतौर पर जल्दी नहीं चल पाता. इसकी जानकारी थर्ड या अंतिम स्टेज में होने पर होती है. तबतक कैंसर उस अवस्था में डेवलप हो चुका होता है कि जान बचना मुश्किल होता है. कैंसर पेशेंट साल या दो साल ही सर्वाइव कर पाता है. कुछ पेशेंट कुछ महीने ही जीवन जी पाते हैं. लेकिन एक कैंसर ऐसा भी है कि विकसित होते समय ही लक्षण बताने लगता है. करीब 3 साल पहले तक मरीजों में कैंसर के लक्षण देखने को मिल जाते हैं. बस उन्हें समय रहते पहचानने की जरूरत है. ​पैंक्रियाटिक कैंसर को लेकर ऐसी ही रिसर्च सामने आई है.

3 साल पहले लक्षण देता है ​पैंक्रियाटिक कैंसरकैंसर को साइलेंट किलर कहा जाता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीएलओएस वन जर्नल में प्रकाशित यूनिवर्सिटी ऑफ सर्रे और यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ताओं ने ​पैंक्रियाटिक कैंसर के लक्षणों को पहचानने की कोशिश की. उनमें वजन कम होना, ब्लड शुगर लेवल बढ़ना, डायबिटीज होना जैसे लक्षण देखेें. शोधकर्ताओं ने बताया कि स्टडी के लिए इंग्लैंड के एक करोड़ से अधिक लोगों के डाटा सेट का विश्लेषण किया. डाटा सेट इतना बड़ा इसलिए देखा गया ताकि सटीक विश्लेषण किया सके. इसमें ​पैंक्रियाटिक कैंसर की डायग्नोस के बारे में जानकारी ली और यह भी देखा कि समय के साथ पेशेंट में क्या बदलाव देखने को मिलता है. 

3 साल पहले बढ़ने लगा ब्लड शुगर लेवलशोधकर्ताओं ने लगभग 9000 ​पैंक्रियाटिक कैंसर रोगियों के बाडी मास इंडेक्स तथा ब्लड शुगर एचबीए1सी लेवल की तुलना उन 35 हजार लोगों से की, जिन्हें यह बीमारी नहीं थी. देखने में आया कि ​पैंक्रियाटिक कैंसर की जानकारी जब पेशेंट को हुई, उससे दो साल पहले ही उसमें अचानक ही वजन कम होने लगा. ब्लड शुगर लेवल तीन साल पहले बढ़ गया. रिसर्चर्स ने बताया कि वेट लॉस होने के साथ ही यदि डायबिटीज है तो ऐसे लोगों को अलर्ट होने की जरूरत है.

लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएनतीजों में सामने आया कि बिना किसी कारण यदि वजन कम हो रहा है. ब्लड शुगर लेवल बढ़ रहा है. यह ​पैंक्रियाटिक कैंसर होने का संभावित संकेत है. अगर वजन लगातार घटता ही जा रहा है. तमाम कोशिशों के बावजूद नहीं बढ़ रहा है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए. डॉक्टर चैकअप कर इलाज शुरू करा सकता है. कैंसर की जांच के लिए सिटी स्कैन, एमआरआई, बायोप्सी वगैरह अन्य जांच कराई जा सकती हैं. डॉक्टरों का कहना है कि यदि बेहद प्राइमरी स्टेज पर कैंसर की पहचान हो जाती है. मरीज के ठीक होने की संभावना उतनी अधिक होती है.

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि और तरीकों को केवल सुझाव के रूप में लें. किसी भी उपचार/दवा/डाइट और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.