नई दिल्लीः वैज्ञानिक और ब्लैक होल का रहस्य बताने वाले महान स्टीफन हॉकिंग का आज कैंब्रिज में निधन हो गया. स्टीफन हॉकिंग 76 साल के थे. 21 वर्ष की उम्र में इन्हें मोटर न्यूरॉन नामक गंभीर बीमारी हो गई थी. इस बीमारी के चलते इनके अधिकत्तर अंगों ने काम करना बंद कर दिया था और धीरे-धीरे इनका पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो था. इसी वजह से इनकी केवल आंख और दिमाग ही काम करते थे. बीमारी के कारण स्टीफन इलेक्ट्रोनिक वॉयस सिंथेसाइज़र की मदद से बात करते थे. बीमारी के बाद इनका पूरा जीवन डॉक्टार की देखरेख में रहा. आमतौर पर इस बीमारी से पीड़ित लोग 2 से 5 साल तक ही जिंदा रह पाते हैं लेकिन स्टीफन कई सालों तक जीएं. इस बीमारी में लंबे समय तक जीने वाले स्टीफन पहले शख्स थे. इन्होंने बीमारी के बाद भी कभी हार नहीं मानी. आज हम आपको बता रहे हैं आखिर मोटर न्यूरॉन बीमारी है क्या.

मोटर न्यूरॉन बीमारी (MND)- मोटर न्यूरॉन एक तरह के नर्व्स सेल्स होते हैं जो मसल्स को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं. यदि ये सेल्स खराब हो जाएं या डैमेज हो जाएं तो ब्रेन और स्पाइन की नर्व्स धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं. नतीजन, नर्व्स सिस्टम बिगड़़ जाता है जिसका इलाज नामुमकिन होता है. इस बीमारी का सबसे आम टाइप एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS) है. वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग भी इसी बीमारी से पीड़ित थे.

किसी भी उम्र में हो सकती है ये बीमारी- मोटर न्यूरॉन बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन अधिकतर मामले 40 की उम्र के बाद ही देखने को मिलते हैं. इतना ही नहीं, ये बीमारी महिलाओं के मुकाबले पुरुषों को अधिक होती है.

मोटर न्यूरॉन के लक्षण- आमतौर पर इसके लक्षण तुरंत समझ नहीं आते साथ ही मोटर न्यूरॉन के अलग-अलग टाइप के लक्षण भी भिन्न होते हैं लेकिन कुछ कॉमन लक्षणों से इस बीमारी का अंदाजा लगाया जा सकता है जैसे-

  • बॉडी में हर समय थकान रहना मसल्स में दर्द होना
  • हाथ-पैरों की मसल्स का कमजोर होना, पैरों में कमजोरी महसूस होना. समस्या बढ़ने पर मरीज चल-फिर भी नहीं पाता.
  • किसी भी सामान को ठीक से ना पकड़ पाना
  • इमोशंस का कंट्रोल में ना रहना
  • कुछ भी खाने में दिक्कत होना
  • सांस लेने या बोलने में दिक्कत होना
  • जबड़े में दर्द महसूस होना

क्या इलाज भी है संभव- बेशक, मोटर न्यूरॉन बीमारी का कोई इलाज नहीं है लेकिन इस बीमारी को कुछ हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. इस बीमारी के लक्षणों का अलग-अलग तरीके से इलाज हो सकता है. जैसे यदि बोलने में दिक्कत है तो स्पीच थेरेपी लेना, मसल्स में पेन है तो फिजियोथेरेपी करवाना, सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो ब्रीदिंग एक्सरसाइज करना.

क्या कहती है रिसर्च- मोटर न्यूरॉन पर पहले आई रिसर्च के मुताबिक ये एक जीन के कारण भी हो सकता है. अमेरिकन जर्नल में प्रकाशित इस रिसर्च में पाया गया कि मोटा न्यूरॉन जेनेटिक हो सकता है. रिसर्च में इस बीमारी के लिए सेनाटाक्सिन (Senataxin) जीन को जिम्मेादार माना गया. जीन में होने के कारण इस बीमारी के लक्षण बचपन या युवावस्था में दिखने लगते हैं.

किनको रहता है अधिक खतरा- अगर घर में किसी को यह बीमारी है या फैमिली हिस्ट्री में किसी को हो चुकी है तो घर के सदस्यों को ये बीमारी होने की आशंका रहती है. हालांकि ये बीमारी 5 प्रतिशत लोगों को ही होती है. इतना ही नहीं, यदि किसी को फ्रंटोटेंपोरल डिमेंशिया नामक दिमागी बीमारी है तो भी उसे मोटर न्यूरॉन संबंधी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है. लेकिन अधिकत्तर मामलों में इस बीमारी का कारण जीन को ही माना गया है.

ये रिसर्च के दावे पर हैं. ABP न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.