हैदराबाद: हैदराबाद स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के शोधार्थियों का कहना है कि खाने में बेहद स्वादिष्ट लगने वाले गूदेदार जामुन की गुठलियों का इस्तेमाल कर भूजल से फ्लोराइड की मात्रा कम करके उसे इस्तेमाल के लायक बनाया जा सकता है.
गुठलियों से बनाया एक्टिवेटेड कार्बन- आईआईटी हैदराबाद के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर चन्द्र शेखर शर्मा की अगुवाई में एक दल ने जामुन की गुठलियों से बनाये गये ‘एक्टिवेटेड कार्बन’ का इस्तेमाल करके पानी में फ्लोराइड के स्तर को कम करने में सफलता हासिल की है.
फ्लोराइड से होती है स्वास्थ्य समस्याएं- अनेक राज्यों के भूजल में फ्लोराइड की अधिकता एक गंभीर समस्या है और इससे स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याएं पैदा होती हैं. आईआईटी दल के इन निष्कर्षो को हाल में ही ‘जनरल ऑफ इनवायरमेंटल केमिकल इंजीनियरिंग’ में प्रकाशित किया गया है.
कैसे की रिसर्च- शोधार्थियों ने जामुन की गुठलियों के पाउडर को अत्यधिक छिद्रयुक्त कार्बन सामग्री में बदल दिया. इसके बाद इसकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिये उच्च तापमान पर संसाधित किया गया.
शर्मा ने बताया कि सबसे पहले इस सामाग्री का परीक्षण प्रयोगशाला में तैयार सिंथेटिक फ्लोराइड पर किया गया. इसके बाद इसका परीक्षण तेलंगाना के नालगोंडा जिले के भूजल के नमूनों पर किया गया. इस क्षेत्र के भूजल में फ्लोराइड की समस्या देश में सबसे ज्यादा है.
रिसर्च के नतीजे- इससे मिले परिणामों में पाया गया कि इस प्रक्रिया के बाद एक लीटर पानी में फ्लोराइड की मात्रा घटकर 1.5 मिलीग्राम से भी कम रह गयी. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह स्वीकार्य मात्रा है.
देश के 17 राज्यों में भूजल में फ्लोराइड की समस्या है. फ्लोराइड मिला हुआ पानी पीने के काम नहीं आता है.
नोट: ये रिसर्च के दावे पर हैं. ABP न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें.
