खाना खाने के बाद पेट फूलना या भारीपन महसूस होना एक आजकल एक नॉर्मल समस्या बनती जा रही है. कई लोगों को यह परेशानी केवल भारी या तला भूना खाना खाने के बाद होती है. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें थोड़ी मात्रा में खाना खाने के बाद भी ब्लोटिंग महसूस होने लगती है. इसकी वजह धीमा पाचन, गैस बनना या लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें हो सकती है.
ज्यादातर लोग इस समस्या को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर यह रोज होने लगे तो लंबे समय तक दिक्कत हो सकती है. ऐसे में डाइट एक्सपर्ट्स नेचुरल तरीके को अपनाने की सलाह देते हैं, जिनमें हर्बल टी एक असरदार ऑप्शन माना जाता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर खाना खाते ही आपको भी ब्लोटिंग की समस्या होती है तो एक्सपर्ट्स इसके लिए कौन सी 6 हर्बल टी बताते हैं, जिनसे आपको आराम मिलेगा.
इन हर्बल टी से तुरंत मिलेगा आराम
अदरक की चाय
अदरक में मौजूद तत्व पाचन प्रक्रिया को तेज करने में मदद करते हैं. यह भोजन को सही तरीके से आगे बढ़ाने में मददगार होता है, जिससे गैस और ब्लोटिंग कम होती है. इसे सुबह खाली पेट या खाने के बाद लिया जा सकता है. खासतौर पर अपच, मतली या हल्के पेट दर्द में फायदेमंद माने जाते हैं. हालांकि जिन लोगों को एसिडिटी ज्यादा होती है या जो ब्लड थिनर दवाएं लेते हैं, उन्हें इससे बचना चाहिए. वहीं अदरक की चाय बनाने के लिए सबसे पहले अदरक को छीलकर धो लें फिर इसे कद्दूकस करें और पानी को उबाल लें. अब पानी में अदरक डालकर से 7 से 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें. इसके बाद इसे छान लें और इसमें स्वादानुसार नींबू या शहद मिलाकर पी लें.
पुदीने की चाय
पुदीना पाचन तंत्र की मांसपेशियों को रिलैक्स करने में मदद करता है. इससे गैस, पेट में भारीपन और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसे लक्षणों से राहत मिल सकती है. खाने के बाद इसे पीना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, लेकिन जिन लोगों को गंभीर एसिड रिफ्लक्स की समस्या है, उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए. पुदीने की चाय बनाने के लिए पुदीने को धोकर हल्का मसल लें, अब उबलते हुए पानी में पत्तियां डालकर 5 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें. इसके बाद आंच बंद कर दें और दो से तीन मिनट तक ऐसे ही रहने दें. फिर इसे छानकर चाहे तो शहद या नींबू मिलाकर पी सकते हैं.
सौंफ की चाय
सौंफ लंबे समय से पाचन से जुड़ी समस्याओं में इस्तेमाल की जाती रही है. यह गैस और सूजन को कम करने में मदद करती है और पेट को हल्का महसूस कराती है. भारी खाने के बाद या रात के खाने के बाद इसे लेना फायदेमंद हो सकता है. हालांकि कुछ खास कंडीशन जैसे प्रेगनेंसी या ब्लीडिंग डिसऑर्डर में इससे बचने की सलाह भी दी जाती है. वहीं सौंफ की चाय बनाने के लिए सौंफ के बीजों को हल्का कुट लें. फिर इसे पानी के साथ उबाल लें और अच्छे से पकने दें. फिर इसे छान कर पी लें, अगर आपको हल्का मीठा पसंद है तो इसमें आप शहद मिला सकते हैं.
कैमोमाइल चाय
कैमोमाइल चाय हल्की सूजन को कम करने और पाचन को शांत करने में मदद करती है. इसके साथ ही यह तनाव को भी कम करती है, जिससे पेट से जुड़ी परेशानी में राहत मिल सकती है. इसे शाम के समय लेना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, हालांकि कुछ लोग जैसे प्रेग्नेंट महिलाएं या कुछ दवाई लेने वालों को इसका सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है. कैमोमाइल चाय बनाने के लिए सबसे पहले कैमोमाइल के फूल या फिर टी बैग गर्म पानी में डालकर 5 से 7 मिनट ढककर रख दें. लास्ट में इसे छानकर शहद या नींबू मिलाकर आप पी सकते हैं.
अजवाइन की चाय
अजवाइन में मौजूद तत्व पाचन को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. यह गैस बनने की समस्या को कम करते हैं और खाने के बाद पेट भारी होने से राहत देते हैं. खासतौर पर तला-भूना या भारी खाना खाने के बाद इसे लेना फायदेमंद हो सकता है. हालांकि प्रेग्नेंट महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए. वहीं अजवाइन की चाय बनाने के लिए भी आप एक बर्तन में पानी गर्म करके उसे उबाल लें और फिर इसमें अजवाइन के बीज डालें. फिर इसे 5 से 7 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें. लास्ट में आप इसे छानकर इसमें काला नमक या नींबू भी मिला सकते हैं.
लेमन ग्रास की चाय
लेमन ग्रास टी को पाचन बेहतर बनाने और ब्लोटिंग कम करने में मददगार माना जाता है. इसे दिन में किसी भी समय लिया जा सकता है. लेकिन दोपहर में पीना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. हालांकि इसे भी कुछ दवाइयां लेने वाले लोगों को पीने से बचना चाहिए. लेमन ग्रास टी बनाने के लिए लेमनग्रास को धो लें और डंठल को हल्का मसल लें. अब इस छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें और उबलते हुए पानी में 5 से 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें. अब इसे कप में छानकर शहद या नींबू मिलाकर पी लें, इससे आपको ब्लोटिंग की समस्या से राहत मिलेगी.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
