Tips To Prevent Mooli Paratha: मूली के पराठे बनाते समय सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब बेलते ही आटा फट जाता है और मूली की स्टफिंग बाहर निकलने लगती है. कई बार सब कुछ सही करने के बावजूद पराठा बेलन के नीचे टिक नहीं पाता. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो इसकी वजह सिर्फ ज्यादा स्टफिंग नहीं है. आटा तैयार करने से लेकर मूली की नमी और बेलने के तरीके तक, कई छोटी गलतियां पराठे को फाड़ सकती हैं.
पराठे के लिए आटा कैसा होना चाहिए?
अच्छे मूली के पराठे की शुरुआत सही आटे से होती है. आटा बहुत सूखा होगा तो बेलते समय उसमें दरारें पड़ सकती हैं, जबकि बहुत ज्यादा गीला आटा चिपचिपा हो जाएगा और उसे संभालना मुश्किल होगा. पराठे के लिए आटा नरम, चिकना और थोड़ा लचीला होना चाहिए.
आटा गूंथते समय पानी एक साथ डालने के बजाय धीरे-धीरे मिलाएं. इससे आपको आटे की सही बनावट समझने में आसानी होगी. आटे में थोड़ा तेल या घी भी मिलाया जा सकता है. अच्छी तरह गूंथा हुआ आटा दबाने पर नरम महसूस होता है और आसानी से खिंचता है.
आटा गूंथने के बाद तुरंत न बेलें
आटा तैयार होने के बाद उसे कुछ समय आराम देना भी जरूरी है. इसे कम से कम 20 मिनट के लिए ढककर रखें. इसके लिए गीले कपड़े का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे आटा आराम करता है और बेलते समय ज्यादा आसानी से फैलता है. अगर गूंथे हुए आटे को तुरंत लोई बनाकर बेलना शुरू कर दिया जाए, तो वह बेलन के दबाव को ठीक से संभाल नहीं पाता और फटने की संभावना बढ़ सकती है.
मूली की स्टफिंग में पानी न रहने दें
मूली के पराठे फटने की सबसे बड़ी वजहों में से एक स्टफिंग में मौजूद अतिरिक्त नमी है. कद्दूकस करने के बाद मूली काफी पानी छोड़ती है. अगर इस पानी को निकाले बिना मूली को आटे में भर दिया जाए, तो बेलते समय अंदर की नमी और दबाव आटे को कमजोर कर सकते हैं. इसलिए कद्दूकस की हुई मूली को अच्छी तरह निचोड़ लें. नमक डालने पर मूली और पानी छोड़ सकती है, इसलिए स्टफिंग तैयार करते समय इसका भी ध्यान रखें. अगर प्याज मिलाया जा रहा है, तो उसमें मौजूद अतिरिक्त पानी को भी कम करें.
स्टफिंग ज्यादा भरने की गलती न करें
पराठे में भरावन ज्यादा रखने से भी आटा फट सकता है. जब लोई के अंदर जरूरत से ज्यादा मूली भर जाती है, तो उसे बेलते समय आटे पर ज्यादा दबाव पड़ता है. इसके बाद किसी कमजोर हिस्से से स्टफिंग बाहर निकलने लगती है. इसलिए स्टफिंग की मात्रा उतनी ही रखें, जितनी आटे के अंदर आराम से बंद हो सके. भरावन रखने के बाद किनारों को ऊपर लाकर अच्छी तरह सील करें. सील कमजोर रहने पर भी बेलते समय पराठा खुल सकता है.
सील करने के बाद ऊपर का अतिरिक्त आटा हटाएं
स्टफिंग बंद करते समय ऊपर की तरफ थोड़ा ज्यादा आटा इकट्ठा हो जाता है. कई लोग इसे वहीं दबाकर छोड़ देते हैं. इससे पराठे के बीच का हिस्सा मोटा और असमान हो सकता है और उसे बेलना मुश्किल हो जाता है. बेहतर होगा कि ऊपर जमा अतिरिक्त आटे को सावधानी से हटा दें. इसके बाद सील वाली जगह को उंगलियों से हल्का दबाकर बराबर कर लें. इससे लोई की सतह ज्यादा चिकनी हो जाएगी और बेलते समय दबाव भी समान रहेगा.
स्टफ की हुई लोई को भी दें थोड़ा आराम
स्टफिंग भरकर लोई तैयार करने के बाद उसे तुरंत बेलने की जरूरत नहीं है. करीब 10 मिनट के लिए इन लोइयों को ढककर रख सकते हैं. गीले कपड़े से ढकने पर आटा सूखेगा नहीं. यह छोटा सा आराम आटे को दोबारा लचीला होने में मदद करता है. इसके बाद बेलते समय लोई ज्यादा आसानी से फैलती है और बार-बार सिकुड़ने या फटने की समस्या कम हो सकती है.
बेलते समय ज्यादा दबाव न डालें
अब सबसे जरूरी है बेलने का तरीका. स्टफ की हुई लोई को पहले उंगलियों से हल्का चपटा करें. इसके बाद बेलने वाली सतह और लोई पर थोड़ा सा सूखा आटा लगाएं. बहुत ज्यादा सूखा आटा इस्तेमाल करने से पराठा सूख सकता है, इसलिए सिर्फ हल्की डस्टिंग पर्याप्त है. बेलन को एक ही दिशा में लगातार चलाने के बजाय कुछ बार हल्के हाथ से बेलें. फिर पराठे को थोड़ा घुमाएं और दूसरी दिशा में बेलें. इससे स्टफिंग एक जगह जमा नहीं होती और आटे पर एकतरफा दबाव भी नहीं पड़ता.
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बेलते समय दरार दिखे तो क्या करें?
अगर बेलते समय छोटी सी दरार दिखाई दे, तो घबराकर लगातार बेलन न चलाएं. तुरंत रुकें और उस जगह पर थोड़ा सा सूखा आटा डालें. उंगली से हल्के हाथ से दबाकर दरार को बंद करें. इसके बाद धीरे-धीरे बेलना शुरू करें.
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