तनिष्क के आभूषण की कीमत केवल सोने या हीरे के वजन से तय नहीं होती. इसके पीछे डिजाइन तैयार करने वाले लोगों, अनुभवी कारीगरों और गुणवत्ता जांच की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. सोने को आकार देने, बारीक नक्काशी करने, हीरे लगाने और आभूषण को अंतिम रूप देने में समय और मेहनत लगती है. यही मेहनत मेकिंग चार्ज का हिस्सा होती है.
तनिष्क में कुछ जटिल आभूषण बनाने में 40 दिन तक लग सकते हैं. कंपनी के अनुसार, उसकी ज्वेलरी पर 35 से अधिक शुद्धता और गुणवत्ता जांच की जाती हैं. तनिष्क अलग से वेस्टेज चार्ज भी नहीं लगाता. ग्राहक को सोने के वास्तविक वजन, मेकिंग चार्ज, रत्नों और टैक्स की साफ जानकारी दी जाती है.
डिजाइन से शुरू होती है आभूषण की यात्रा
तनिष्क में आभूषण बनाने की शुरुआत डिजाइन से होती है. कंपनी की डिजाइन टीम पारंपरिक भारतीय कला और आज के पहनावे को ध्यान में रखकर नए डिजाइन तैयार करती है. डिजाइन बनाते समय केवल आभूषण की सुंदरता ही नहीं देखी जाती. उसके वजन, आकार, मजबूती और उसे पहनने में मिलने वाले आराम पर भी ध्यान दिया जाता है. डिजाइन टीम को कई बातें तय करनी होती हैं.
● आभूषण का आकार और वजन कितना होगा?● उसमें सोना, हीरा या दूसरे रत्न कैसे लगाए जाएंगे?● कौन-सा हिस्सा हाथ से बनाया जाएगा?● मशीनों की मदद कहां ली जा सकती है?● आभूषण को तैयार करने में कितनी बारीक कारीगरी लगेगी?● रोज पहनने वाली ज्वेलरी को आरामदायक कैसे बनाया जाएगा?
इन फैसलों से आभूषण बनाने की प्रक्रिया और उसमें लगने वाला समय तय होता है.
तनिष्क के कारीगर डिजाइन को असली आभूषण में बदलते हैं
डिजाइन तैयार होने के बाद कारीगर उसे वास्तविक आकार देते हैं. सोने को मोड़ना, जोड़ना, नक्काशी करना, रत्न लगाना और पॉलिश करना उनके काम का हिस्सा है. तनिष्क की मूल कंपनी टाइटन ने कारीगरों के लिए विशेष कार्य केंद्र बनाए हैं, जिन्हें कारीगर पार्क और कारीगर सेंटर कहा जाता है. इन केंद्रों का उद्देश्य कारीगरों को बेहतर कार्यस्थल, उपकरण, प्रशिक्षण और काम करने की सुविधाएं देना है.
टाइटन की 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल के घाटाल, मिदनापुर और कोलकाता के अंकुरहाटी में कारीगरों के लिए कौशल केंद्र स्थापित किए गए. कंपनी की 2024-25 की रिपोर्ट में मिदनापुर में स्थानीय कारीगरों के लिए एक निर्माण केंद्र विकसित करने की भी जानकारी दी गई है. इससे कारीगरोंको अपने घर के नजदीक काम करने का अवसर मिलता है.
अलग-अलग राज्यों की कारीगरी को कैसे शामिल करता है तनिष्क?
तनिष्क भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की पारंपरिक तकनीकों का इस्तेमाल करता है. इसकी एकत्वम कलेक्शन में कई राज्यों के कारीगरों की कला को शामिल किया गया था.
इसमें प्रमुख रूप से शामिल थीं:
● तमिलनाडु की नकाशी कला: सोने पर उभरी हुई बारीक आकृतियां और सजावट तैयार करना.● बंगाल की फिलिग्री कला: धातु के पतले तारों से जाल जैसे बारीक डिजाइन बनाना.● गुजरात की रवा कला: सोने के छोटे दानों जैसी सजावट से आभूषण को रूप देना.● मीनाकारी और जाली का काम: रंगीन सजावट और बारीक कटाव से डिजाइन तैयार करना.
तनिष्क ने अपनी एकत्वम कलेक्शन में तमिलनाडु की नकाशी, बंगाल की फिलिग्री और गुजरात की रवा कला के इस्तेमाल की आधिकारिक पुष्टि की है.
एक जटिल आभूषण बनाने में कितना समय लगता है?
हर आभूषण बनाने में एक जैसा समय नहीं लगता. साधारण सोने की चेन और बारीक डिजाइन वाले हार की प्रक्रिया अलग होती है. एक जटिल आभूषण को तैयार करने में मॉडल बनाना, धातु को आकार देना, रत्न लगाना, पॉलिश करना और गुणवत्ता जांच जैसे कई काम शामिल हो सकते हैं.
तनिष्क के अनुसार, उसकी कुंदन स्टोरीज और विरासत से प्रेरित कुछ कलेक्शन में कई अनुभवी कारीगर मिलकर काम करते हैं. ऐसे कुछ जटिल आभूषणों को पूरा करने में 40 दिन तक लग सकते हैं. तनिष्क ने प्रत्येक आभूषण के निर्माण चरणों की एक निश्चित संख्या या जटिल डिजाइन के लिए काम के कुल घंटों का प्रमाणित आंकड़ा प्रकाशित नहीं किया है. इसलिए सभी डिजाइनों पर एक ही संख्या लागू नहीं की जा सकती.
कारीगरी के बाद होती है गुणवत्ता जांच
आभूषण बनने के बाद उसकी मजबूती, फिनिशिंग और शुद्धता की जांच की जाती है. तनिष्क के अनुसार, ज्वेलरी को 35 से अधिक गुणवत्ता और शुद्धता की जांचों से गुजरना पड़ता है. अलग-अलग आभूषणों की जांच उनकी बनावट के अनुसार की जाती है.
● चूड़ियों की जांच: चूड़ी कितनी अच्छी तरह मोड़ और दबाव सह सकती है, यह देखा जाता है.● चेन की जांच: चेन और उसके जोड़ की खिंचाव-सहन करने की क्षमता जांची जाती है.● हुक और क्लैस्प की जांच: आभूषण को बंद रखने वाला हिस्सा ठीक से काम कर रहा है या नहीं, यहजांचा जाता है.● फिनिशिंग की जांच: आभूषण की सतह, किनारों और जोड़ों की गुणवत्ता की जांच की जाती है.● शुद्धता की जांच: सोने की शुद्धता और संबंधित प्रमाणों की पुष्टि की जाती है.
तनिष्क के आधिकारिक मेकिंग चार्ज विवरण में चूड़ी, चेन और हुक की मजबूती की जांच का उल्लेख मिलता है. हालांकि, क्लैस्प को कितनी बार खोलकर और बंद करके जांचा जाता है, इसकी निश्चित संख्या सार्वजनिक रूप से नहीं बताई गई है.
सोने की ज्वेलरी पर बीआईएस हॉलमार्क और एचयूआईडी से भी शुद्धता की पुष्टि की जा सकती है. एचयूआईडी हॉलमार्क वाले आभूषण की एक अलग पहचान संख्या होती है. तनिष्क के स्टोर में कैरेटमीटर से सोने की शुद्धता जांचने की सुविधा भी मिलती है.
हीरों की गुणवत्ता और वजन की जांच
सोने की तरह ही हीरे की ज्वेलरी के लिए भी गुणवत्ता जांच महत्वपूर्ण होती है. तनिष्क में हीरों को कट, रंग, स्पष्टता और कैरेट वजन के आधार पर जांचा जाता है. इन चार बातों को हीरे के 4सी कहा जाता है. तनिष्क के अनुसार:
● 10 करोड़ से अधिक हीरों का मूल्यांकन किया जा चुका है.● जांचे गए हीरों में लगभग 5 प्रतिशत ही उसके गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं.● हीरे का वजन 3 दशमलव स्थानों तक मापा जाता है.● आभूषण में लगाने से पहले हीरे के वजन की जांच की जाती है.
उदाहरण के लिए, किसी हीरे का वजन 2.912 कैरेट है, तो उसकी कीमत तय करते समय 2.912 कैरेट ही माना जाता है. उसे 3 कैरेट मानकर कीमत नहीं लगाई जाती. इससे ग्राहक को हीरे के वास्तविक वजन के आधार पर कीमत की जानकारी मिलती है.
मेकिंग चार्ज क्या होता है?
मेकिंग चार्ज वह शुल्क है जो सोने या दूसरी सामग्री को तैयार आभूषण में बदलने की कारीगरी, समय और निर्माण प्रक्रिया के लिए लिया जाता है. इसमें कारीगर की मेहनत के साथ कई तरह के काम शामिल हो सकते हैं.
● सोने को आकार देना और जोड़ना.● हाथ से नक्काशी और मीनाकारी करना.● जाली और दूसरे बारीक डिजाइन तैयार करना.● हीरे या रत्न लगाना.● आभूषण की पॉलिश और फिनिशिंग करना.● निर्माण में मशीनों और विशेष उपकरणों का उपयोग करना.● गुणवत्ता और मजबूती की जांच करना.
तनिष्क में मेकिंग चार्ज कैसे तय होता है?
तनिष्क के अनुसार, मेकिंग चार्ज आभूषण के मूल्य के प्रतिशत के रूप में तय किया जाता है. यह डिजाइन, कारीगरी और निर्माण में लगने वाले समय पर निर्भर करता है. तनिष्क में सोने की ज्वेलरी पर मेकिंग चार्ज लगभग 7 प्रतिशत से और सोने के सिक्कों पर लगभग 3 प्रतिशत से शुरू हो सकता है. वास्तविक शुल्क उत्पाद के अनुसार बदलता है.
साधारण सोने की चेन में कम बारीक काम हो सकता है. वहीं कुंदन, मीनाकारी या कई परतों वाले हार में ज्यादा समय और अनुभवी कारीगरों की जरूरत पड़ सकती है. यही वजह है कि दो आभूषणों का सोने का वजन बराबर होने पर भी उनका मेकिंग चार्ज अलग हो सकता है.
तनिष्क अलग से वेस्टेज चार्ज नहीं लगाता
ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और वेस्टेज चार्ज का अंतर समझना जरूरी है. कुछ स्थानीय या गैर-ब्रांडेड जौहरी मेकिंग चार्ज के अलावा वेस्टेज चार्ज भी जोड़ सकते हैं. तनिष्क में अलग से वेस्टेज चार्ज नहीं लगाया जाता. ग्राहक को मेकिंग चार्ज और बाकी कीमत का विवरण दिया जाता है. हालांकि, सभी स्थानीय जौहरी वेस्टेज चार्ज लेते हों, ऐसा जरूरी नहीं है. वेस्टेज चार्ज आम तौर पर आभूषण बनाने के दौरान सोने की संभावित बर्बादी के नाम पर लिया जाता है.
तनिष्क में नेट वेट बिलिंग होती है. इसका मतलब है कि ग्राहक से सोने की कीमत केवल आभूषण में मौजूद वास्तविक सोने के वजन के आधार पर ली जाती है. पत्थर, लाख या दूसरी गैर-सोने की सामग्री के वजन पर सोने का भाव नहीं लगाया जाता. इस तरह ग्राहक को पता रहता है कि वह सोने, कारीगरी, रत्नों और टैक्स के लिए कितना भुगतान कर रहा है.
हल्की ज्वेलरी में नई तकनीक का इस्तेमाल
आज कई ग्राहक ऐसी ज्वेलरी चाहते हैं जो दिखने में अच्छी हो और रोज पहनने में ज्यादा भारी न लगे. तनिष्क हल्की ज्वेलरी बनाने के लिए आधुनिक निर्माण तकनीकों का इस्तेमाल करता है. टाइटन की वार्षिक रिपोर्ट में 3डी प्रिंटिंग, नई धातु तकनीकों और कम वजन वाली ज्वेलरी के विकास का उल्लेख है. इन तकनीकों से डिजाइन के जरूरी आकार और सुंदरता को बनाए रखते हुए सोने का वजन कम करने पर काम किया जाता है. इससे रोज पहनने वाली अंगूठियां, झुमके, पेंडेंट और अन्य ज्वेलरी को हल्का बनाने में मदद मिलती है.
टाइटन ने विंग्स इन मोशन जैसी कलेक्शन में भी कम सोने के वजन के साथ बारीक डिजाइन तैयार करने का उल्लेख किया है. हालांकि, सभी हल्के डिजाइनों के वजन में एक समान प्रतिशत की कमी नहीं होती. तनिष्क के सत्यापित आधिकारिक स्रोतों में किसी एक निश्चित प्रतिशत की पुष्टि नहीं मिली है. इसलिए ऐसे डिजाइनों की सही तुलना उनके वास्तविक वजन और उत्पाद विवरण के आधार पर की जानी चाहिए.
खरीद के समय कीमत और प्रमाण की जानकारी
तनिष्क में ग्राहक को आभूषण की कुल कीमत के साथ उसके अलग-अलग हिस्सों की जानकारी भी दी जाती है. खरीद के समय ग्राहक इन बातों की जांच कर सकता है.
● सोने का कैरेट और शुद्धता.● सोने का वास्तविक वजन.● बीआईएस हॉलमार्क और एचयूआईडी.● मेकिंग चार्ज.● हीरे या दूसरे रत्नों का वजन और कीमत.● लागू टैक्स.● अंतिम बिल की कुल राशि.
हीरे की ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहक उसके प्रमाणपत्र की जानकारी भी देख सकता है. तनिष्क के डायमंड एक्सपर्टीज सेंटर में लाइटस्कोप और डायमंड क्लैरिटी व्यूअर जैसे उपकरणों की मदद से हीरे की चमक और अंदर मौजूद विशेषताओं को समझा जा सकता है.
खरीद के बाद भी मिलती हैं सेवाएं
आभूषण खरीदने के बाद उसकी सफाई और समय-समय पर देखभाल करना जरूरी होता है. तनिष्क ज्वेलरी की सफाई, पॉलिश और रखरखाव से जुड़ी आजीवन सेवाएं उपलब्ध कराता है. इन सेवाओं का दायरा उत्पाद और लागू शर्तों के अनुसार समझना चाहिए. इसके अलावा, ग्राहक पुराने सोने को नई ज्वेलरी से बदलने की सुविधा भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
तनिष्क के अनुसार, उसकी एक्सचेंज सुविधा में 9 कैरेट से 22 कैरेट तक का पुराना सोना स्वीकार किया जा सकता है. इसमें दूसरे जौहरी से खरीदा गया सोना भी शामिल हो सकता है. सोने की शुद्धता और वजन की जांच के बाद उसका मूल्य तय किया जाता है. ग्राहक इस मूल्य का उपयोग नई ज्वेलरी खरीदने के लिए कर सकते हैं. तनिष्क के गोल्ड एक्सचेंज प्रोग्राम की मौजूदा शर्तें खरीद से पहले देखी जा सकती हैं.
कारीगर से ग्राहक तक हर चरण बनाता है आभूषण का मूल्य
तनिष्क के आभूषण का मूल्य केवल सोने या हीरे की कीमत तक सीमित नहीं है. डिजाइन तैयार करने से लेकर कारीगर की मेहनत, बारीक नक्काशी, गुणवत्ता जांच और सही वजन पर बिलिंग तक कई चरण इसमें शामिल होते हैं. कुछ जटिल डिजाइन तैयार करने में 40 दिन तक लग सकते हैं. तनिष्क में 35 से अधिक गुणवत्ता और शुद्धता जांच, 3 दशमलव स्थान तक हीरे का वजन और अलग से वेस्टेज चार्ज नहीं लगाने जैसी प्रक्रियाएं ग्राहक को कीमत समझने में मदद करती हैं.
कारीगरों की पारंपरिक कला, आधुनिक तकनीक, स्पष्ट मेकिंग चार्ज और खरीद के बाद मिलने वाली सेवाएं मिलकर तनिष्क की ज्वेलरी को ग्राहक तक पहुंचाती हैं.
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