तेलंगाना से महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी तस्वीर सामने आ रही है, जो सिर्फ कागजी दावों तक सीमित नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने #SheInspiresUs नाम से एक मुहिम शुरू की थी, जिससे प्रेरित होकर राज्य में लड़कियों को सिर्फ सरकारी योजनाओं का 'फायदा लेने वाला' नहीं, बल्कि 'फैसले लेने वाला' बनाया जा रहा है.हाल ही में हैदराबाद में iVision यूथ पार्लियामेंट 2025 का फाइनल मुकाबला हुआ. यहां उन लड़कियों को मंच पर अपनी बात रखते देखा गया, जो कभी स्कूल जाने के लिए भी हिचकिचाती थीं. आज ये बेटियाँ देश के कानून, संविधान और शासन जैसे गंभीर मुद्दों पर पूरे आत्मविश्वास के साथ बहस कर रही हैं. कैसे बदला ये सब?

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यह बदलाव रातों-रात नहीं आया. इसके पीछे हरी चंदना जैसे अधिकारियों की एक सोची-समझी रणनीति है, जिसे हम तीन आसान स्टेप्स में समझ सकते हैं:

  • बाहर निकलना (10K रन): समाज में लड़कियों की मौजूदगी बढ़ाने के लिए '10K रन' जैसे इवेंट्स कराए गए. इससे लोगों की सोच बदली और बेटियों को घर से बाहर निकलकर अपनी पहचान बनाने का हौसला मिला.
  • जरूरी सुविधाएं और सम्मान: अक्सर लड़कियां पीरियड्स और साफ-सफाई की कमी की वजह से स्कूल छोड़ देती थीं. 'मासिक धर्म गरिमा' जैसे अभियानों ने इस समस्या को दूर किया, ताकि उनकी पढ़ाई न रुके और उनका आत्मसम्मान बना रहे.
  • अपनी बात कहना (यूथ पार्लियामेंट): जब लड़कियां स्वस्थ हुईं और स्कूल जाने लगीं, तो उन्हें 'यूथ पार्लियामेंट' जैसा मंच दिया गया. यहाँ उन्हें सिखाया गया कि वे सिर्फ दर्शक नहीं हैं, बल्कि देश की नीतियां बनाने में अपनी राय भी दे सकती हैं.

सिर्फ मदद नहीं, अब लीडरशिप की बारी

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तेलंगाना का यह मॉडल दिखाता है कि असली बदलाव तब आता है जब बेटियों को सिर्फ सुविधाएं न दी जाएं, बल्कि उन्हें लीडर बनने के लिए तैयार किया जाए. यह एक लंबी सोच का नतीजा है, जहाँ बेटी के बचपन से लेकर उसके बड़े होने तक हर कदम पर उसका साथ दिया जा रहा है. सरकार का कहना है कि आज की ये बेटियां इस बात का सबूत हैं कि अगर सही मौका और माहौल मिले, तो गांव-कस्बों की लड़कियां भी देश की बड़ी मेजों पर बैठकर फैसले ले सकती हैं.

(This copy has been produced by the Infotainment Desk)