India 2047 Conclave: जाने-माने अर्थशास्त्री और योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष, मोंटेक सिंह अहलूवालिया, सुबह 10 बजे ABP नेटवर्क के 'India @ 2047 Conclave' को संबोधित करेंगे. इस सत्र का प्रसारण ABP News और नेटवर्क के YouTube चैनल पर किया जाएगा.
उनके संबोधन का विषय होगा "PPP को पुनर्जीवित करना - इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग की नई सोच" (Reviving PPP - Reimagining Infrastructure Financing), जिसमें भारत में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल्स के भविष्य और इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग पर खास ज़ोर दिया जाएगा.
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अनुभवी अर्थशास्त्री और नीति-निर्माता
मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने 2004 से 2014 तक भारत के योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया और उन्हें भारत के आर्थिक सुधारों के प्रमुख शिल्पकारों में से एक माना जाता है. अपने करियर के दौरान, उन्होंने सरकार में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किया, जिनमें 1988 से 1990 तक प्रधानमंत्री के विशेष सचिव, 1990 से 1991 तक वाणिज्य सचिव, और 1993 से 1998 तक वित्त सचिव के पद शामिल हैं.
योजना आयोग में अपने कार्यकाल के दौरान, कैबिनेट मंत्री के दर्जे के साथ काम करते हुए, उन्होंने 11वीं और 12वीं पंचवर्षीय योजनाओं के निर्माण की देखरेख की, जिनका मुख्य उद्देश्य समावेशी और सतत विकास था.
शैक्षणिक और अंतर्राष्ट्रीय योगदान
अहलूवालिया ने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से B.A. की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, उन्हें रोड्स स्कॉलरशिप पर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय जाने का अवसर मिला, जहाँ उन्होंने अर्थशास्त्र में M.A. और M.Phil. दोनों डिग्रियाँ हासिल कीं.
उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत 1968 में विश्व बैंक से की और बाद में वे वहाँ के सबसे कम उम्र के डिवीज़न प्रमुखों में से एक बने. 2001 से 2004 तक, उन्होंने वाशिंगटन, D.C. स्थित अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में स्वतंत्र मूल्यांकन कार्यालय के पहले निदेशक के रूप में कार्य किया.
सम्मान और सार्वजनिक नीति में निरंतर भूमिका
2011 में, अहलूवालिया को सार्वजनिक सेवा और आर्थिक नीति के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान, 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया गया.
उन्होंने भारत के तीव्र विकास के वर्षों के दौरान अपने अनुभवों को 2019 में प्रकाशित अपनी संस्मरण पुस्तक, "Backstage: The Story Behind India’s High Growth Years" में लिपिबद्ध किया है. उन्होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्टर्न स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के ब्लावतनिक स्कूल ऑफ़ गवर्नमेंट में प्रतिष्ठित प्रोफ़ेसर के पदों पर भी कार्य किया है.
वर्तमान में वे ऑक्सफ़ोर्ड के मैग्डलेन कॉलेज के मानद फ़ेलो हैं, और भारत की आर्थिक नीति, जलवायु रणनीति तथा वैश्विक समष्टि-आर्थिक मुद्दों पर होने वाली बहसों में अपना योगदान देना जारी रखे हुए हैं.
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