World Tiger Day:  29 जुलाई को पूरी दुनिया में हर साल वर्ल्ड टाइगर डे मनाया जा रहा है. इस दिन का मुख्य उद्देश्य बाघों को बचाने और उनके जंगल को सुरक्षित रखने की याद दिलाने के लिए मनाया जाता है. बता दें कि भारत के लिए यह दिन खास है, क्योंकि दुनिया में जितने भी बाघ बचे हैं, उनमें से 70 प्रतिशत से ज्यादा बाघ अकेले भारत में हैं. साथ ही ये भारत का राष्ट्र सपशु भी माना जाता है. ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल आता है की देश में सबसे ज्यादा बाघ किस देश में है, तो इसमें  मध्य प्रदेश का नाम सबसे ऊपर आता है, यही वजह है कि यह देश का टाइगर स्टेट कहलाता है. लेकिन जहां एक तरफ बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ उनके रहने के लिए जंगल कम पड़ते जा रहे हैं. इसी वजह से अब बाघ जंगल छोड़कर शहरों और गांवों में दिखाई देने लगे हैं. 

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एमपी बना नंबर-1 टाइगर स्टेट

साल 2022 की आधिकारिक बाघ गणना के मुताबिक मध्य प्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए थे, जो देश के सभी राज्य से सबसे ज्यादा थे. इसके बाद कर्नाटक, उत्तराखंड और महाराष्ट्र का नंबर आया. इतना ही नहीं 202 के बाद भी एमपी में बाघों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है और वन विभाग के नए अनुमान के मुताबिक अब यह आंकड़ा 1000 के पार पहुंच चुका है. साथ ही एमपी में देश के सबसे ज्यादा छह टाइगर रिजर्व हैं, जिनमें कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, पन्ना और संजय दुबरी शामिल हैं. 

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जंगल छोटे, बाघ ज्यादा

बाघों की संख्या जितनी तेजी से बढ़ी है, उतनी तेजी से उनके लिए जंगल का दायरा छोटा पड़ता जाता है. बता दें कि एक बाघ को अपने इलाके में रहने और शिकार के लिए काफी बड़ी जगह चाहिए होती है, और साल भर में उसे करीब तीन सौ से ज्यादा शिकार की जरूरत पड़ती है. जब जंगल में इतने बाघों को रहने की जगह नहीं मिलती, तो कमजोर और जवान बाघ अपने लिए नया इलाका ढूंढने जंगल की सीमा से बाहर निकलने लगते हैं और जंगल के आसपास इलाकों यानी गांवों और कई बार शहरी इलाकों के करीब तक पहुंच जाते हैं. 

यही वजह है कई जगहों से टाइगर का इंसानों से आमने-सामने होने की खबरें लगातार सामने आती रहा है.  इससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल बना रहता है और वन विभाग को बार-बार बाघों को पकड़कर या रेस्क्यू कर वापस जंगल में छोड़ना पड़ता है.  इसी वजह से अब सरकार ने वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से यह पता लगाने को कहा है कि एमपी के जंगल असल में कितने बाघों को संभाल सकते हैं. जिससे यह जरूरी हो सके कि सिर्फ बाघों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान न दिया जाए, बल्कि उनके लिए सुरक्षित और पर्याप्त जंगल बनाने पर भी उतना ही ध्यान दिया जाए. 

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