Indian Suicides in Gulf Countries: हर साल बड़ी संख्या में भारतीय बेहतर नौकरी के मौकों की तलाश में खाड़ी देशों में जाते हैं. लेकिन विदेश मंत्रालय की तरफ से संसद में पेश किए गए हालिया आंकड़ों में खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय प्रवासी मजदूरों की मासिक सेहत और भलाई को लेकर चिंता को दर्शाया गया है. आंकड़ों के मुताबिक 2023 और 2025 के बीच खाड़ी देशों में 1,340 भारतीय नागरिकों ने आत्महत्या कर ली है. यह आंकड़ा उस दौरान विदेशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा की गई कुल आत्महत्याओं का 70% से ज्यादा है. आइए जानते हैं क्या है इन आत्महत्याओं के पीछे की वजह.

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खाड़ी देशों में आत्महत्या से मौतें 

विदेश मंत्रालय के मुताबिक 2023 और 2025 के बीच विदेश में 1900 भारतीय नागरिकों ने आत्महत्या की. इनमें से 1340 मौतें खाड़ी सहयोग परिषद देश में हुई हैं. इसका मतलब है कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों से जुड़े ऐसे सभी मामलों में 70% से ज्यादा मामले खाड़ी देशों से ही आए हैं. आपको बता दें कि ऐसा अनुमान है कि लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रह और काम कर रहे हैं. 

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देश-वार आंकड़े 

संसद में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों में 2023 और 2025 के बीच खाड़ी देशों में भारतीय नागरिकों की आत्महत्या से हुई मौतों का ब्यौरा दिया गया है. इनमें संयुक्त अरब अमीरात में 511, सऊदी अरब में 354, कुवैत में 162, ओमान में 146, बहरीन में 101 और कतर में 66 मौतें दर्ज की गई हैं. खाड़ी क्षेत्र के बाहर इसी अवधि में मलेशिया में 131, अमेरिका में 62 और इटली, कनाडा व यूनाइटेड किंगडम में से हर एक में 30 से ज्यादा मामले सामने आए हैं.

आर्थिक दबाव और कर्ज का बोझ

रिपोर्ट के मुताबिक कई प्रवासी मजदूर भर्ती, वीजा और यात्रा का खर्च उठाने के लिए कर्ज लेकर खाड़ी देशों में जाते हैं. कुछ मजदूरों को वहां पहुंचने के बाद सैलरी मिलने में देरी, वेतन में कटौती या फिर लंबे समय तक वेतन न मिलने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है. इस वजह से कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाता है और आर्थिक तनाव बढ़ जाता है. 

रहने और काम करने के मुश्किल हालात 

काम की जगह और रहने-सहने के ऐसे हालातों की तरफ भी इशारा किया गया है जो प्रवासी मजदूरों में मानसिक परेशानी की वजह बन सकते हैं. इनमें काफी ज्यादा भीड़-भाड़ वाली रहने की जगह, 12 घंटे तक की लंबी शिफ्ट, आराम के लिए कम समय और काम की जगह पर सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं शामिल हैं. इस तरह के हालात अपने परिवारों से दूर रहने वाले मजदूरों पर काफी ज्यादा मानसिक दबाव डाल सकते हैं.

काम की जगह पर होने वाले हादसे 

दरअसल खाड़ी देशों में काम की जगह पर होने वाले हादसों में हर हफ्ते औसतन तीन भारतीय मजदूरों की मौत हो जाती है. 2023 और 2025 के बीच सऊदी अरब में भारतीय मजदूरों की काम की जगह पर 182 मौतें दर्ज की गई. जानकारी में इस बात कभी जिक्र है कि कुछ प्रवासी कल्याण संगठनों ने यह आरोप लगाया है कि काम की जगह पर होने वाली कुछ मौतों को कभी-कभी अलग-अलग मेडिकल वजहों के तहत दर्ज कर दिया जाता है.  

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विदेश में काम करने वाले मजदूरों के लिए सरकारी उपाय 

भारत सरकार ने विदेश में भारतीय मजदूरों की मदद के लिए कई बड़ी पहल शुरू की हैं. प्रवासी भारतीय बीमा योजना पात्र मजदूरों को दुर्घटना में मौत या फिर स्थायी विकलांगता की स्थिति में ₹10 लाख तक का बीमा कवर देती है. इसी के साथ प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र दुबई, रियाद और जेद्दा जैसे शहरों में काम करता है और मुश्किल में फंसे मजदूरों को कानूनी सलाह, काउंसलिंग और मदद देता है. विदेश में मरने वाले भारतीय नागरिकों के शवों को वापस लाने से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए eCARe पोर्टल भी शुरू किया गया है.

विदेश मंत्रालय के ताजा आंकड़े खाड़ी देशों में भारतीय प्रवासी मजदूरों के सामने आने वाली चुनौतियों को दिखाते हैं. हालांकि आर्थिक वजह से होने वाला प्रवास लाखों लोगों को रोजगार दे रहा है लेकिन ये आंकड़े विदेश में काम करने वाले भारतीय मजदूरों की भलाई के लिए काम की सुरक्षित स्थिति, समय पर वेतन भुगतान, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और शिकायत के असरदार समाधान के तंत्र की जरूरत को भी दर्शाते हैं.

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