World Emoji Day 2026: आज के समय में शायद ही कोई ऐसा होगा जो मोबाइल पर चैट करते समय इमोजी (Emoji) का इस्तेमाल नहीं करता हो. खुशी हो, दुख हो, गुस्सा हो या किसी को प्यार जताना हो, लोग अपनी बात इमोजी के जरिए भी बताते हैं. कई बार सिर्फ एक छोटा सा इमोजी वह बात कह देता है, जिसे समझाने के लिए कई शब्द लिखने पड़ते हैं.

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यही वजह है कि हर साल 17 जुलाई को World Emoji Day मनाया जाता है. इस दिन लोग इमोजी के इतिहास और उसके इस्तेमाल के बारे में बात करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया का पहला इमोजी किसने बनाया था और इसकी शुरुआत कैसे हुई? आइए जानते हैं.

सबसे पहला Emoji किसने बनाया था?

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दुनिया का पहला आधुनिक इमोजी जापान के शिगेताका कुरिता (Shigetaka Kurita) ने साल 1999 में बनाया था. उस समय वह जापान की मोबाइल कंपनी NTT DoCoMo में काम करते थे. उस दौर में मोबाइल पर मैसेज भेजने की सुविधा तो थी, लेकिन लोग अपनी भावनाएं ठीक से नहीं बता पाते थे. कई बार सामने वाला मैसेज का मतलब गलत समझ लेता था. इसी परेशानी को दूर करने के लिए शिगेताका कुरिता ने इमोजी बनाने का फैसला किया. उन्होंने कुल 176 इमोजी तैयार किए थे. इनमें हंसता चेहरा, दिल, सूरज, बादल, बारिश, फोन, घड़ी और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले कई दूसरे निशान शामिल थे. हर इमोजी का आकार सिर्फ 12×12 पिक्सल था. आकार छोटा था, लेकिन इनका काम बहुत बड़ा था.

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इमोजी बनाने का आइडिया कैसे आया?

शिगेताका कुरिता चाहते थे कि लोग बिना ज्यादा शब्द लिखे अपनी बात आसानी से समझा सकें. उन्होंने जापान की रोजमर्रा की जिंदगी, मौसम, सड़क के निशानों और कॉमिक्स से प्रेरणा लेकर इमोजी बनाए. लोगों को यह तरीका इतना पसंद आया कि धीरे-धीरे दूसरी मोबाइल कंपनियों ने भी इमोजी देना शुरू कर दिया. इसके बाद इमोजी पूरी दुनिया में इस्तेमाल होने लगे.

आज क्यों हैं इतने लोकप्रिय?

आज WhatsApp, Instagram, Facebook, X और दूसरे सोशल मीडिया ऐप्स पर हजारों इमोजी मौजूद हैं. हंसना हो, रोना हो, ताली बजानी हो, जन्मदिन की शुभकामनाएं देनी हों या किसी को दिल भेजना हो, हर बात के लिए अलग इमोजी मिल जाता है. यही वजह है कि आज बच्चे हों या बड़े, लगभग हर कोई हर दिन इमोजी का इस्तेमाल करता है. छोटे से इमोजी ने लोगों के बात करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है और अब यह हमारी डिजिटल जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है.

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