Bank Licence: काफी लोग अपना बैंक शुरू करने का सपना देखते हैं लेकिन क्या भारत में ऐसा करना असल में मुमकिन है? इसका जवाब है हां. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ऑन टॉप लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत योग्य व्यक्ति और संस्था बैंक शुरू करने के लिए आवेदन कर सकती है. हालांकि बैंक खोलने के लिए सिर्फ पैसे की जरूरत नहीं होती बल्कि इसके लिए कड़े नियमों को पूरा करना, अपनी आर्थिक विश्वसनीयता को साबित करना और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से मंजूरी लेना जरूरी होता है.
बैंक खोलने के लिए कितने पैसे की जरूरत होती है?
कम से कम पूंजी की जरूरत बैंक की कैटेगरी के हिसाब से अलग-अलग तय की गई है.
पेमेंट्स बैंक
पेमेंट्स बैंक के लिए कम से कम ₹100 करोड़ की पूंजी की जरूरत होती है. यह बैंक हर ग्राहक से ₹2,00,000 तक की जमा राशि स्वीकार कर सकते हैं और डिजिटल पेमेंट या फिर मनी ट्रांसफर की सुविधा दे सकते हैं. हालांकि इन्हें लोन या फिर क्रेडिट कार्ड जारी करने की इजाजत नहीं होती.
स्मॉल फाइनेंस बैंक
स्मॉल फाइनेंस बैंक के लिए कम से कम ₹200 करोड़ की पूंजी की जरूरत होती है. यह बैंक मुख्य रूप से किसान, माइक्रो एंटरप्राइज, छोटे व्यवसाय और समाज के उन वर्गों की सेवा करते हैं जिनकी बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच कम है. यह बचत खाता, जमा और छोटे लोन जैसी सुविधा दे सकते हैं.
यूनिवर्सल बैंक
यूनिवर्सल बैंक को कमर्शियल बैंक भी कहा जाता है. इसके लिए कम से कम ₹500 करोड़ की पूंजी की जरूरत होती है. यह बैंक हर तरह की सुविधा दे सकते हैं जैसे की बचत और चालू खाता, पर्सनल और कॉर्पोरेट लोन, इंटरनेशनल बैंकिंग और निवेश से जुड़ी सेवा.
बैंक खोलने के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
इसके लिए सिर्फ पूंजी ही काफी नहीं होती. आरबीआई के नियम के मुताबिक प्रमोटर के पास बैंकिंग, फाइनेंस या फिर फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में कम से कम 10 साल का अनुभव होना चाहिए. आवेदक को आरबीआई के फिट एंड प्रॉपर मानदंडों को भी पूरा करना होगा. यानी उनका आर्थिक, कानूनी और नैतिक रिकॉर्ड साफ-सुथरा होना चाहिए.
इसके अलावा प्रमोटर के पास बैंक की शुरुआती पेड-अप कैपिटल का कम से कम 40% हिस्सा होना चाहिए. साथ ही यह हिस्सेदारी 5 साल तक लॉक रहती है.
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बैंकिंग लाइसेंस पाने की प्रक्रिया क्या है?
पहला कदम प्रस्तावित बैंक को कंपनीज एक्ट, 2013 के तहत एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी के तौर पर रजिस्टर करना है. कंपनी बनने के बाद आवेदक को आरबीआई को एक डीटेल्ड एप्लीकेशन जमा करनी होगी. इसमें एक कॉम्प्रिहेंसिव बिजनेस प्लान, फाइनेंशियल अनुमान, गवर्नेंस फ्रेमवर्क और टेक्नोलॉजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की जानकारी शामिल हो.
अगर प्रस्ताव सभी रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करता है तो आरबीआई इन प्रिंसिपल अप्रूवल दे सकता है. यह आमतौर पर 18 महीनों के लिए मान्य होता है.
आरबीआई के दूसरे जरूरी नियम
फाइनेंशियल इन्क्लूजन को बेहतर बनाने के लिए सभी ब्रांच में से कम से कम 25% ब्रांच ग्रामीण या फिर ऐसे इलाकों में खोली जानी चाहिए जहां पर बैंकिंग सुविधा नहीं हैं. स्मॉल फाइनेंस बैंकों के मामले में कुल लोन पोर्टफोलियो का कम से कम 50% हिस्सा 25 लाख रुपये तक के लोन का होना चाहिए. ऐसा इसलिए ताकि यह पक्का हो सके कि सभी बैंक मुख्य रूप से छोटे उधारकर्ता और प्रायरिटी सेक्टर की सेवा कर रहा है.
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