Fake Army Uniform: दिखावे के लिए या फिर दूसरों को प्रभावित करने के लिए सैन्य वर्दी पहनना काफी आम लग सकता है. लेकिन कानूनी स्थिति कपड़ों और इसे पहनने के पीछे के इरादे पर निर्भर करती है. भारतीय कानून सामान्य नागरिक फैशन को जानबूझकर लोगों को धोखा देने के लिए आधिकारिक दिखने वाली वर्दी, बैज या फिर प्रतीक चिन्ह का इस्तेमाल करने से अलग करता है. अगर कोई व्यक्ति इस वर्दी का इस्तेमाल अधिकार का प्रयोग करने, पैसा लेने या फिर दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए करता है तो उसे जेल या फिर जुर्माना भुगतना पड़ सकता है. 

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भारतीय न्याय संहिता की धारा 168 के तहत सेना, नौसेना या फिर वायु सेना के साथ-साथ भारतीय सशस्त्र बलों की नकली वर्दी पहनने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है. सजा 3 महीने तक की कैद, ₹2000 तक का जुर्माना या फिर दोनों हो सकती है. 

धोखा देने का इरादा जरूरी 

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सिर्फ वर्दी जैसे कपड़े पहनना अपने आप में अपराध की श्रेणी में नहीं आता. जरूरी तत्व जनता या फिर अधिकारियों को यह विश्वास दिलाकर धोखा देने का इरादा है कि इसे पहनने वाला शख्स वास्तव में सशस्त्र बल का सदस्य है. कानून गलत धारणा बनाने के लिए वर्दी, बैज, या फिर प्रतीक चिन्ह के जानबूझकर इस्तेमाल पर केंद्रित है. 

यह अंतर उन लोगों के लिए मायने रखता है जो फैशन के तौर पर सेना से प्रेरित कपड़े पहनते हैं. एक नागरिक जो सेना प्रिंट या फिर कैमोफ्लाज पैटर्न वाली पतलून या जैकेट पहना है उसे सिर्फ इसी वजह से अपराधी नहीं माना जाता. हालांकि सुरक्षा वजहों से भारतीय सेना नागरिकों को आधिकारिक भारतीय सेना पैटर्न पहनने से बचने की सलाह देती है. इस वजह से लोगों को गुमराह करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले साधारण फैशन के कपड़े और आधिकारिक दिखने वाली वर्दी एक ही चीज नहीं है. 

नकली पुलिस वर्दी को कवर करने वाले नियम 

भारतीय न्याय संहिता नकली पुलिस वर्दी और बैज पहनने या फिर दिखाने पर भी रोक लगाती है. धारा 205 के तहत कोई व्यक्ति जो पुलिस की वर्दी पहनता है, वाहन पर नकली पुलिस स्टीकर या फिर लाल नीली बत्ती लगाता है या फिर नकली पुलिस बैज रखता है उसे 3 महीने तक की जेल या जुर्माना हो सकता है.

काफी गंभीर अपराध तब पैदा होता है जब कोई व्यक्ति कपड़े पहनने से आगे निकल जाता है और असली में खुद को एक पुलिस अधिकारी बताता है.  भारतीय न्याय संहिता की धारा 204 एक लोक सेवक का रूप धारण करने से जुड़ी हुई है. उदाहरण में सड़क पर रुकावट डालना, जनता से दस्तावेजों की मांग करना या फिर असली पुलिस अधिकारी होने का दावा करते हुए आदेश जारी करना शामिल है. ऐसा करने पर 2 साल तक की जेल या फिर जुर्माना हो सकता है. 

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दुरुपयोग कब ज्यादा गंभीर हो जाता है? 

अगर नकली वर्दी का इस्तेमाल लोगों को डराने या फिर वित्तीय या फिर मानसिक नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है तो संभावित कानूनी परिणाम बढ़ सकते हैं. अगर कोई पुलिस अधिकारी या सशस्त्र बल का सदस्य बनकर पैसे की मांग करता है, फर्जी ट्रैफिक जुर्माना वसूलत है या फिर रिश्वत मांगता है तो जबरदस्ती वसूली से जुड़े आरोप लगाए जा सकते हैं. ऐसे मामले में 3 साल या फिर उससे ज्यादा की जेल हो सकती है.

धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप भी लग सकते हैं जहां पर मनगढ़ंत दस्तावेज शामिल हों. झूठे प्राधिकार को असली दिखाने के लिए नकली पहचान पत्र, नकली साइन या फिर नकली वारंट बनाने से गंभीर जालसाजी के आरोप लग सकते हैं. ऐसे अपराध के लिए दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की जेल की सजा हो सकती है.

आधिकारिक दिखने वाली वर्दी पहनने पर विचार करने वाले किसी भी व्यक्ति को इस बात को समझना चाहिए की झूठी पहचान बनाने या फिर अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए इसका इस्तेमाल करने पर मामूली जुर्माने से बड़े परिणाम हो सकते हैं.

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