Duplicate Voter Registration: भारत निर्वाचन आयोग का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची को अपडेट और रिफाइन करने के लिए एक बड़ा अभ्यास है. आपको बता दें कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत एक नागरिक को सिर्फ उसी निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकरण करने की अनुमति है जहां वे आमतौर पर रहते हैं. 

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लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या एक व्यक्ति के पास दो जगह वोटर कार्ड हो सकते हैं? आइए जानते हैं कि आखिर दो जगह वोटर कार्ड कैसे बन जाते हैं और यह गलती कहां होती है.

डुप्लीकेट वोटर आईडी कैसे बनाई जाती है? 

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एक सामान्य वजह एक जगह से दूसरी जगह जाने के बाद पिछले स्थान से नाम हटाने में भूल है. गांव से शहर या फिर एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर व्यक्ति नए पते पर मतदाता पहचान पत्र के लिए आवेदन कर सकता है. लेकिन अपने पुराने निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में अपना नाम छोड़ सकता है.

फॉर्म 6 और फॉर्म 8 के बीच भ्रम भी समस्या को पैदा कर सकता है. निवास स्थान बदलने या फिर पता बदलने के लिए फॉर्म 8 का इस्तेमाल किया जाता है. इसी के साथ फॉर्म 6 नए मतदाता पंजीकरण के लिए है. अगर जगह बदली गई है और कोई व्यक्ति फॉर्म 8 के बजाय फॉर्म 6 जमा करता है तो एक अलग रिकॉर्ड बनाया जा सकता है. संभावित रूप से एक नई मतदाता फोटो पहचान पत्र या ईपीआईसी संख्या के साथ.

शिक्षा या फिर नौकरी के लिए जगह बदलना एक और स्थिति है जिसमें डुप्लीकेट वोटर आईडी कार्ड बन सकता है. छात्र और कामकाजी पेशेवर अपने गृह नगर में पंजीकृत रहते हुए पहचान या फिर प्रत्येक के उद्देश्य से नए शहर में मतदाता पहचान पत्र ले सकते हैं. 

तकनीकी और वेरिफिकेशन सीमा भी योगदान दे सकती है. चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर और बूथ लेवल ऑफिसर या बीएलो एप्लीकेशन को डुप्लीकेट एंट्री की पहचान करने के लिए डिजाइन किया गया है. हालांकि मतदाता का नाम, पिता का नाम या फिर पते में छोटा अंतर होने पर भी सिस्टम रिकॉर्ड से मिलान करने में विफल हो सकता है. 

कानून क्या कहता है? 

एक से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्र में या एक ही निर्वाचन क्षेत्र में एक से ज्यादा बार पंजीकरण कराना गैरकानूनी है. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 17 और 18 एक से ज्यादा पंजीकरण पर रोक लगाती है. उल्लंघन पर 1 साल तक की कैद, जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं. 

इस वजह से दो मतदाता पहचान पत्र रखना सिर्फ एक प्रशासनिक अनियमितता नहीं है अगर यह डुप्लीकेट पंजीकरण को दर्शाता है. चुनाव के दौरान दोनों जगह पर मतदान करना चुनावी धोखाधड़ी का एक गंभीर रूप है और इसके परिणाम में वोट अमान्य भी घोषित किया जा सकता है. 

डुप्लीकेट एंट्री को कैसे ठीक किया जा सकता है? 

अगर किसी व्यक्ति का नाम दो जगह पर पंजीकृत है तो एक एंट्री को हटा दिया जाना चाहिए. चुनाव आयोग का मतदाता सेवा पोर्टल और मतदाता हेल्पलाइन एप्लीकेशन फॉर्म 7 जमा करने के लिए एक ऑनलाइन रास्ता देता है. आवेदकों को 1 वजह चुननी चाहिए जैसे कि डुप्लीकेट एंट्री या फिर निवास में परिवर्तन और अनुरोध सबमिट करना चाहिए.

फार्म 7 पास के बूथ लेवल अधिकारी या फिर उप-विभागीय मजिस्ट्रेट के कार्यालय से मिल सकता है. पूरा फॉर्म उस मतदाता पहचान पत्र की एक कॉपी के साथ जमा किया जाना चाहिए जिसे आवेदक रद्द करना चाहता है. सत्यापन के बाद संबंधित एंट्री को मतदाता सूची से हटा दिया जाता है.

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जिम्मेदारी कहां है? 

डुप्लीकेट रिकॉर्ड माइग्रेशन, गलत फॉर्म, ना हटाए गए पंजीकरण या फिर बेमेल विवरण के परिणाम स्वरुप हो सकते हैं. एसआईआर जमीनी स्तर पर सत्यापन के जरिए से मतदाता सूची की सटीकता में सुधार करना चाहता है. सही स्थानांतरण प्रक्रिया इस्तेमाल करने और पिछली एंट्री को हटाने से नकल और उसके कानूनी परिणाम को रोकने में मदद मिल सकती है. दोनों रूपों के बीच अंतर जरूरी है क्योंकि एक जगह बदलने का अनुरोध मौजूदा पंजीकरण को अपडेट करता है जबकि एक नया आवेदन एक और रिकॉर्ड बना सकता है.

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