Universe End: दशकों से वैज्ञानिकों का ऐसा मानना था कि ब्रह्मांड हमेशा फैलता ही रहेगा. लेकिन अब नई रिसर्च ने उस धारणा को चुनौती दे दी है. नए सबूत यह बताते हैं कि डार्क एनर्जी, वह रहस्यमय शक्ति जो ब्रह्मांड के विस्तार को चला रही है शायद हमेशा स्थिर ना रहे. अगर ऐसा सच में होता है तो समय, अंतरिक्ष और खुद ब्रह्मांड के अंतिम भाग्य के बारे में हमारी समझ पूरी तरह से बदल सकती है.

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क्या कहती है नई रिसर्च 

एक दक्षिण कोरियाई रिसर्च टीम के हालिया विश्लेषण ने खगोल विज्ञान समुदाय में बहस छेड़ दी है. रिसर्च के मुताबिक लगातार फैलने के बजाय ब्रह्मांड धीमा हो सकता है, रुक सकता है और उल्टा भी हो सकता है. इस स्थिति में गुरुत्वाकर्षण फिर से कंट्रोल हासिल कर लेगा और आकाशगंगाओं को वापस एक साथ खींचेगा. इससे बिग क्रंच के नाम से जानी जाने वाली एक विनाशकारी घटना होगी.

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आपको बता दें कि डार्क एनर्जी, जो आकाशगंगाओं को एक दूसरे से दूर धकेल रहा है, काफी कमजोर हो रहा है. इससे संभावना यह है कि यह इतना कमजोर हो जाएगा कि गुरुत्वाकर्षण आकाशगंगाओं को वापस से एक साथ खींचना शुरू कर देगा. हालांकि कई खगोलविद अभी भी संदेह में हैं लेकिन कोई भी डेटा को पूरी तरह से खारिज नहीं कर पाया है.

डार्क एनर्जी जरूरी क्यों है 

डार्क एनर्जी कोई छोटी चीज नहीं है. यह पूरे ब्रह्मांड का लगभग 68% हिस्सा बनाती है. यह वह शक्ति है जो आकाशगंगाओं को एक दूसरे से बढ़ती गति से दूर धकेलना के लिए जिम्मेदार है. अभी तक वैज्ञानिकों का ऐसा मानना था कि इसकी शक्ति स्थिर है. लेकिन नई रिसर्च से यह पता चलता है कि डार्क एनर्जी विकसित हो रही है. इसके व्यवहार में छोटा सा बदलाव भी ब्रह्मांड के लंबे समय के भाग्य को बदल सकता है.

क्या होता है द बिग क्रंच 

साउथ कोरियाई टीम की रिसर्च ने बिग क्रंच थ्योरी में फिर से दिलचस्पी जगा दी है. अगर डार्क एनर्जी कमजोर होती है तो ग्रेविटी फैलाव को पूरी तरह से रोक सकती है और उसे उल्टा कर सकती है. गैलेक्सीज एक दूसरे के करीब आने लगेंगी, तापमान बढ़ेगा, और ब्रह्मांड सिकुड़ जाएगा. कुछ फिजिसिस्ट को इस बात का भी अंदाजा लगा रहे हैं कि इससे एक नया ब्रह्मांड बन सकता है. हालांकि यह विचार अभी भी पूरी तरह से थ्योरेटिकल है.

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