Raghav Chadha: राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से राघव चड्ढा को हटाए जाने से राजनीतिक बहस छिड़ गई है. अब अशोक मित्तल इस भूमिका को संभालेंगे. इसी बीच कई लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या इस पद से हटने के बाद राघव चड्ढा के वेतन पर असर पड़ेगा? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

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वेतन पर कोई असर नहीं 

डिप्टी लीडर के पद से हटाए जाने के बाद भी राघव चड्ढा का वेतन कम नहीं होगा. ऐसा इस वजह से है क्योंकि राज्यसभा में डिप्टी लीडर की भूमिका कोई संवैधानिक या फिर वैधानिक पद नहीं है. यह पार्टी का एक आंतरिक पद है, जिसका मतलब है कि इसके साथ कोई भी अतिरिक्त सरकारी वेतन या फिर आधिकारिक वित्तीय भत्ता नहीं होता. संसद सदस्य के तौर पर राघव चड्ढा को वह मानक वेतन और भत्ते मिलते रहेंगे जो सभी सांसदों को दिए जाते हैं. 

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एमपी के वेतन और भत्तों का ब्यौरा

भारत में सांसदों के वेतन का ढांचा पार्टी में उनकी भूमिकाओं की परवाह किए बिना एक जैसा ही रहता है. राघव चड्ढा को हर महीने ₹1,24,000 का मूल वेतन मिलता है. इसके अलावा उन्हें हर महीने ₹70,000 का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और ₹60,000 का कार्यालय खर्च भत्ता भी मिलता रहेगा. संसद सत्र या फिर समिति की बैठक में शामिल होने के लिए उन्हें ढाई हजार का दैनिक भत्ता भी मिलेगा. 

हटाए जाने के बाद क्या बदलता है? 

हालांकि इसमें कोई वित्तीय नुकसान नहीं है, लेकिन इसका असली असर उनके प्रभाव और जिम्मेदारियों पर पड़ता है. डिप्टी लीडर के तौर पर  राघव चड्ढा पहले पार्टी की संसदीय रणनीति को संभालने में एक बड़ी भूमिका निभाते थे. उन्हें हटाए जाने के बाद वह अधिकार अब अशोक मित्तल के पास चला गया है. 

डिप्टी लीडर के पद के साथ कई बड़ी जिम्मेदारियां जुड़ी होती हैं. इन जिम्मेदारियों में राज्यसभा सचिवालय के साथ तालमेल बिठाना, बहस में पार्टी के भागीदारी को संभालना और सांसदों के बीच अनुशासन को बनाए रखना शामिल होता है. यह भूमिका खत्म होने के बाद चड्ढा को अब इन मामलों में कोई प्राथमिकता नहीं मिलेगी. जिम्मेदारियों में बदलाव के बावजूद एक सांसद के तौर पर मिलने वाले बाकी सभी विशेषाधिकार बरकरार रहेंगे. चड्ढा को दिल्ली में सरकारी आवास, रेल और हवाई यात्रा का लाभ और CGHS योजना के तहत चिकित्सा सुविधाएं मिलती रहेंगी.

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