मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने बड़ा सैन्य कदम उठाते हुए ईरान के खिलाफ सीधी कार्रवाई की है. अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरान के दक्षिणी तट पर मौजूद मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाकर जबरदस्त हमला किया है. बताया गया जा रहा है कि इस हमले में अमेरिका ने अपने सबसे ताकतवर हथियारों में शामिल 5000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार अमेरिकी बलों ने ईरान के तटीय इलाकों में मौजूद मजबूत मिसाइल ठिकानों पर डीप पेनिट्रेटर बम गिराए हैं.
आपको बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारत सहित कई देशों के टैंकर फंसे हुए हैं. हालांकि हाल ही में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दो भारतीय टैंकरों को सुरक्षित निकालने की अनुमति दी थी. वहीं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव और समुद्र में लगातार हो रहे हमलो के बीच यह सवाल उठने लगा है कि जिन जहाज पर भारतीय नाविक काम कर रहे हैं या जिनके नाम भारतीय लगते हैं, उन्हें विदेशी जहाज क्यों कहा जा रहा है. मौजूदा हालात में यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ गया है, क्योंकि कई ऐसे जहाज निशाने पर आए हैं, जिनका भारत से किसी न किसी रूप में संबंध दिखाई देता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि जिन शिप पर भारतीय काम कर रहे हैं, विदेशी क्यों कहा जा रहा है? ये भी पढ़ें-Oil Crisis Impact: पूरी दुनिया में तेल किल्लत हुई तो भी इस देश पर नहीं पड़ेगा असर, बिना ईंधन भी नहीं होगी परेशानी
जहाज की पहचान नाम नहीं, झंडे से होती है
समुद्र में किसी जहाज की असली पहचान उसके नाम या मालिक से नहीं होती है, बल्कि उसके झंडे से तय होती है. जहाज जिस देश में रजिस्टर होता है, वहीं उसका फ्लैग स्टेट कहलाता है और उसी देश के कानून उसे जहाज पर लागू होते हैं. यही वजह है कि अगर किसी जहाज का नाम भारतीय हैं या उस पर भारतीय नाविक काम कर रहे हैं, तब भी अगर वह किसी दूसरे देश में रजिस्टर है तो वह उसे उसी देश का जहाज माना जाएगा.
क्या कहता है इंटरनेशनल कानून?
समुद्री नियमों के तहत हर जहाज का किसी एक देश में रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है. यह व्यवस्था पहले जिनेवा कन्वेंशन और बाद में संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून के जरिए तय की गई थी. इन नियमों के अनुसार जहाज केवल उसी देश का झंडा लगा सकता है, जहां वह रजिस्टर है और उसकी सुरक्षा जांच और नियमों के पालन की जिम्मेदारी भी उसी देश की होती है.
कई जहाज के नाम भारतीय, लेकिन विदेशी झंडा क्यों?
कई बार देखने को मिलता है कि कई जहाज के नाम भारतीय होते हैं, लेकिन उनका झंडा पनामा, लाइबेरिया या मार्शल आइसलैंड जैसे देशों का होता है. इसके पीछे मुख्य वजह यह है इन देशों में जहाज रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान और कम खर्चीली होती है. इसके अलावा टैक्स कम लगता है और कई मामलों में मालिकाना हक की जानकारी भी सार्वजनिक नहीं करनी पड़ती है. यही कारण है कि दुनिया के हजारों जहाज इन देशों के झंडों के तहत चलते हैं. वहीं जब कोई कंपनी अपने जहाज को ऐसे देश में रजिस्टर कराती है, जहां नियम आसान हो तो उसे फ्लैग ऑफ कन्वीनियंस कहा जाता है. यह समुद्री उद्योग में एक आम प्रथा है और इसी वजह से जहाज का नाम और उसकी असली पहचान अलग-अलग हो सकती है.
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