जापानभले ही तकनीकी और तरक्की के मामले में दुनिया में मिसाल माना जाता है, लेकिन शाही परिवार के उत्तराधिकार को लेकर आज भी वहां का सिस्टम महिलाओं के साथ बराबरी नहीं करता है. जहां पूरी दुनिया में महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है. वहीं, जापान में सम्राट की कुर्सी पर बैठने का अधिकार आज भी सिर्फ पुरुषों तक सीमित है. इसवजहसेजापानकीप्रिंसेसआइकोकेसमर्थनमेंजापानकेलोगउत्तराधिकारकानूनमेंबदलावकीमांगकररहेहैं. ऐसेमेंचलिएआजहमआपकोबतातेहैंकिक्यासिर्फलड़कीहोनेकेकारणप्रिंसेसआइकोसिंहासननहींपासकतीहैऔरइसकेपीछेकीवजहक्याहै.
क्यासिर्फपुरुषहीबनसकतेहैंजापानकेसम्राट?
दरअसलजापानमेंसम्राटकीकुर्सीकोक्रिसैंथेममथ्रोनकहाजाताहै. वहींजापानमेंसदियोंसेसम्राटकीकुर्सीपरबैठनेकाअधिकारकेवलपुरुषउत्तराधिकारियोंकोमिलताआयाहै. शाहीपरिवारकादावाहैकिउनकावंशसूर्यदेवीअमातेरासु से चलता है और यह परंपरा पुरुष वंश के आधार पर ही आगे बढ़ाई जाती है. कानून के अनुसार उत्तराधिकारी केवल पितृ वंश पर निर्भर है, यानी सम्राट की केवल पुरुष संतान पुत्र या फिर पोता ही अगला सम्राट बन सकता है. वहीं नियमों के अनुसार शाही परिवार की बेटियां भले ही बड़ी हो या योग्य हो वह सिंहासन की दावेदार नहीं मानी जाती है.
महिलाएं क्यों नहीं बन सकती जापान की रानी?
जापान के इतिहास में अब तक आठ महिला सम्राट रही है, लेकिन वह भी सिर्फ तब जब कोई पुरुष उत्तराधिकारी मौजूद नहीं था. उनके शासन के बाद फिर से पुरुष ही सिंहासन पर बैठते रहे हैं. वहीं शाही परिवार की महिला सदस्यों के लिए एक और बड़ी पाबंदी यह है कि अगर वह आम नागरिक से शादी करती है तो उसे शाही दर्जा छोड़ना पड़ता है. इसके साथ ही वह उत्तराधिकार से भी बाहर हो जाती है.
प्रिंसेस आइको को सिंहासन से दूर करने वाला कानून
जापान के वर्तमान सम्राट नारुहितो की सिर्फ एक संतान प्रिंसेसआइको है. प्रिंसेसआइको जापान में बहुत लोकप्रिय है और जापान की जनता उन्हें बहुत पसंद करती है, लेकिन जापान का इंपीरियलहाउसहोल्डलॉ साफ कहता है कि महिलाएं सम्राट नहीं बन सकतीं. इस वजह से आइको अपने पिता की इकलौती संतान होते हुए भी इस पद की हकदार नहीं हैं. इसके बाद जापान के सिंहासन के अगले वारिस सम्राट के भाई के 18 साल के बेटे प्रिंसहिसाहितो माने जाते हैं, जो शाही परिवार के अपनी पीढ़ी के इकलौते पर पुरुष सदस्य हैं. यही वजह है कि जापान की यह 2000 साल पुरानी राजशाही अब उत्तराधिकार के संकट का सामना कर रही है.
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