Opium Addiction: अफीम की लत सिर्फ शरीर को ही नुकसान नहीं पहुंचाती बल्कि यह धीरे-धीरे दिमाग के काम करने के तरीकों को भी बदल देती है. यही एक वजह है कि अफीम का इस्तेमाल करने वाले कई लोग यह समझ नहीं पाते कि उनके जिंदगी कितनी बुरी तरह से प्रभावित हो रही है. यहां तक कि जब उनकी सेहत, करियर, आर्थिक स्थिति और रिश्ते टूटने लगते हैं तब भी वह व्यक्ति अक्सर इस बात को पूरी तरह से समझे बिना कि कितना नुकसान हो रहा है, नशीले पदार्थ का इस्तेमाल करना जारी रखता है. वैज्ञानिकों का ऐसा कहना है कि अफीम में मौजूद ओपिओइड सीधे तौर पर दिमाग के इनाम और फैसले लेने वाले सिस्टम पर असर डालते हैं. यह नशीला पदार्थ शांति और संतुष्टि का एक झूठा अहसास पैदा करता है. 

Continues below advertisement

अफीम दिमाग पर कैसे असर डालती है? 

इंसानी दिमाग और रीढ़ की हड्डी में खास ओपिओइड  रिसेप्टर होते हैं. जब भी कोई व्यक्ति अफीम का सेवन करता है तो इसके सक्रिय रसायन इन रिसेप्टर से जुड़ जाते हैं और दर्द के संकेतों को रोक देते हैं. इससे आराम और शारीरिक के साथ-साथ भावनात्मक तनाव से कुछ समय के लिए राहत का एहसास होता है. इसी के साथ दिमाग बड़ी मात्रा में डोपामाइन छोड़ता है जिसे आमतौर पर अच्छा महसूस करने वाला रसायन कहा जाता है. डोपामाइन का यह अचानक बढ़ा हुआ स्तर व्यक्ति को ज्यादा खुशी और मानसिक सुकून देता है. इस वजह से वह बार-बार इस नशीले पदार्थ का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित होता है. 

Continues below advertisement

फैसले लेने की क्षमता पर असर 

लंबे समय तक अफीम का इस्तेमाल धीरे-धीरे प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स को नुकसान पहुंचाता है. यह दिमाग का वह हिस्सा है जो सही गलत का फैसला करने, तर्क करने और फैसले लेने के लिए जिम्मेदार होता है. जैसे-जैसे यह हिस्सा कमजोर पड़ने लगता है व्यक्ति सही और गलत को ठीक से समझने या फिर अपनी कामों के नतीजों का अंदाजा लगाने की क्षमता खोने लगता है. यही वजह है कि लत का शिकार हुए कई लोग इस बात को पहचान नहीं पाती कि यह नशीला पदार्थ उनकी जिंदगी पर कितना गंभीर असर डाल रहा है.

इस्तेमाल करने वालों को क्या महसूस होता है? 

विशेषज्ञ बताते हैं कि लत लगने पर व्यक्ति अपनी स्थिति के प्रति जागरूक रहने की क्षमता को भी पूरी तरह से खो सकता है. कुछ मामलों में दिमाग अपनी निजी समस्याओं को ठीक से समझने में असमर्थ हो जाता है. इस स्थिति को एनोसोग्नोसिया कहते हैं.

इससे एक झूठा अहसास पैदा होता है कि जिंदगी पूरी तरह से कंट्रोल्ड है. परिवार के सदस्यों को यह नुकसान साफ तौर पर दिखाई दे सकता है लेकिन लत का शिकार व्यक्ति अक्सर इस पूरी तरह से स्वीकार नहीं कर पाता. 

यह भी पढ़ेंः सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुआ हमला, क्या इस पर कार्रवाई कर सकते हैं लोकसभा स्पीकर?

अफीम बाकी हर चीज से ज्यादा जरूरी बन जाती है 

वक्त के साथ दिमाग अफीम को जीवित रहने के लिए एक जरूरी चीज मानने लगता है. जैसे-जैसे लत गहरी होती जाती है प्राथमिकताएं बदलने लगती हैं. करियर, इज्जत, पैसा और रिश्ते यह सभी चीज नशीले पदार्थ की जरूरत के मुकाबले धीरे-धीरे अपनी अहमियत खोने लगती हैं. यही वजह है कि लत का शिकार हुए लोग अफीम के नुकसानदेह असर के बारे में जानते हुए भी उसका इस्तेमाल करना जारी रख सकते हैं.

इसे छोड़ना मुश्किल 

भले ही कोई व्यक्ति अफीम छोड़ना चाहता हो लेकिन इसे छोड़ने पर होने वाले लक्षण काफी ज्यादा दर्दनाक हो सकते हैं. इन लक्षणों में शरीर में तेज दर्द, उल्टी, चिंता, पसीना आना, बेचैनी और नींद ना आना शामिल हो सकते हैं.

यह भी पढ़ेंः अंतरिक्ष का मलबा कैसे ठप कर सकता है रोजमर्रा की जिंदगी, जानें इंसानों को इससे क्यों है खतरा?