Attack on Abhishek Banerjee: पश्चिम बंगाल के सोनापुर दौरे के दौरान अभिषेक बनर्जी पर हमला किया गया. वे वहां चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ितों से मिलने गए थे. रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने टीएमसी नेता पर कच्चे अंडे फेंके और उन पर शारीरिक हमले करने की भी कोशिश की. जैसे ही स्थिति तनावपूर्ण हुई सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत सांसद के चारों तरफ एक सुरक्षा घेरा बना लिया और उन्हें हेलमेट पहनाकर सुरक्षित रूप से उस इलाके से बाहर निकाला. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या लोकसभा अध्यक्ष सांसदों पर होने वाले हमलों से जुड़े ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई कर सकते हैं.
क्या लोकसभा अध्यक्ष कार्रवाई कर सकते हैं?
लोकसभा अध्यक्ष के पास संवैधानिक और संसदीय नियमों के तहत कार्रवाई करने का अधिकार है. बस शर्त यह है कि किसी सांसद पर उनके आधिकारिक कर्तव्यों के संबंध में, या फिर सांसद के तौर पर उनकी स्थिति की वजह से हमला किया गया हो.
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत सांसदों को विशेष अधिकार और कुछ इम्यूनिटी दी गई हैं. इन्हें संसदीय विशेषाधिकार के नाम से जाना जाता है. अगर कोई सांसद संसदीय कामों से जुड़े कर्तव्यों का पालन करते समय किसी बाधा, धमकी या हमले का सामना करता है तो इसे विशेषाधिकार हनन या सदन की अवमानना माना जा सकता है.
नियम 222 के तहत क्या होता है?
लोकसभा की कार्य प्रकिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 222 के मुताबिक प्रभावित सांसद या फिर सदन का कोई दूसरा सदस्य अध्यक्ष के सामने विशेषाधिकार हनन का नोटिस प्रस्तुत कर सकता है. अध्यक्ष सबसे पहले यह जांच करते हैं कि क्या यह मामला विचार-विमर्श के योग्य है. अगर अध्यक्ष को लगता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है तो नोटिस को औपचारिक रूप से स्वीकार किया जा सकता है.
मामला विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सकता है
नोटिस स्वीकार करने के बाद अध्यक्ष इस मुद्दे को विशेषाधिकार समिति के पास भेज सकते हैं. इस समिति में 15 सदस्य होते हैं जिन्हें अध्यक्ष द्वारा नामित किया जाता है. यह समिति घटना की पूरी जांच कर सकती है, गवाहों को समन भेज सकती है और इस संबंध में एक रिपोर्ट तैयार कर सकती है कि क्या संसदीय विशेषाधिकारों का उल्लंघन हुआ है.
यह भी पढ़ेंः सरकार ने लोगों के मोबाइल पर भेजा मौसम का अलर्ट, जानें दुनिया में किसके पास है सबसे तगड़ा वार्निंग सिस्टम?
सरकारों से भी रिपोर्ट मांगी जा सकती है
क्योंकि कानून व्यवस्था राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है इस वजह से लोकसभा अध्यक्ष इस घटना के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय या फिर पश्चिम बंगाल प्रशासन से भी तथ्यात्मक रिपोर्ट मांग सकते हैं. यह रिपोर्ट संसद को यह समझने में मदद करती है कि क्या हमले के दौरान सांसद के संसदीय अधिकारों या फिर गरिमा में कोई बाधा डाली गई थी.
संसद किस तरह की कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है?
अगर विशेषाधिकार समिति जांच के बाद किसी व्यक्ति को दोषी पाती है तो संसद के पास उस पर कार्रवाई की सिफारिश करने का अधिकार होता है. इसमें आरोपी को सदन के सामने बुलाकर फटकार लगाना या फिर चेतावनी देना शामिल हो सकता है. काफी गंभीर मामलों में संसद एक तय समय के लिए जेल की सजा की सिफारिश भी कर सकती है.
यह भी पढ़ेंः दुनिया के किन देशों में चलते हैं प्लास्टिक के नोट, सबसे पहले किसने शुरू किया था?
