Crude Oil: दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार फारस की खाड़ी में है. लेकिन सवाल यह उठता है कि दुनिया में इतना ज्यादा कच्चा तेल कहीं और क्यों नहीं है? दरअसल इसके पीछे की वजह दुर्लभ परिस्थितियां हैं. इन दुर्लभ परिस्थितियों की वजह से भारी मात्रा में तेल बना, जमा हुआ और जमीन के नीचे फंसा रह गया. 

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कहां से हुई शुरुआत? 

लगभग 10 से 20 करोड़ साल पहले आज के मिडिल ईस्ट का ज्यादातर हिस्सा टेथिस महासागर नाम के एक गर्म और उथले समुद्र से ढका हुआ था. यह वातावरण जीवन से भरपूर था. यहां छोटे-छोटे जीव भारी संख्या में पनपते थे. जब ये जीव मर जाते थे तो वे समुद्र की तलहटी में डूब जाते थे. क्योंकि वहां ऑक्सीजन का स्तर कम था, इस वजह से वे पूरी तरह से सड़-गल नहीं पाते थे. इसके बजाय समय के साथ जैविक पदार्थ की परतें एक के ऊपर एक जमती गईं. 

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जमीन के नीचे तेल 

लाखों साल बाद अरब प्लेट और यूरेशिया प्लेट के बीच हुई टक्कर ने सब कुछ बदल दिया. इस बड़ी भू वैज्ञानिक घटना की वजह से जाग्रोस पर्वत जैसी संरचनाएं बनीं और जमीन के नीचे गहरे गड्ढे तैयार हो गए. यह गड्ढे प्राकृतिक भंडारण क्षेत्र की तरह काम करने लगे. 

गर्मी और दबाव ने जीवन को तेल में बदल दिया 

जैसे-जैसे ये परत एक के ऊपर एक जमती गईं जमीन के नीचे दबे हुए जैविक पदार्थ को पृथ्वी के गर्भ में मौजूद भीषण गर्मी और दबाव का सामना करना पड़ा. लाखों सालों तक चली इस प्रक्रिया ने धीरे-धीरे उन पदार्थों को हाइड्रोकार्बन में बदल दिया. इसी हाइड्रोकार्बन को आज हम कच्चे तेल के नाम से जानते हैं. 

जमा रहा तेल 

तेल का बनना तो कहानी का सिर्फ आधा हिस्सा है. फारसी खाड़ी क्षेत्र में नमक और चूना पत्थर जैसी कुछ चट्टानों की परतों ने गुंबद जैसी संरचना बना ली. इन्हें कैप रॉक्स कहा जाता है. यह संरचना ढक्कन की तरह काम करती थी और तेल को जमीन की सतह पर बाहर निकलने से रोकती थी.

यह प्रक्रिया हर जगह क्यों नहीं हुई? 

वैसे तो दुनिया के कई हिस्सों में तेल पाया जाता है लेकिन जो बात फारसी खड़ी को अनोखा बनाती है वह है इन सभी कारकों का एक साथ मिलना. प्रचुर मात्रा में जैविक जीवन, दफन होने के सही हालात, जबरदस्त गर्मी और दबाव और मजबूत प्राकृतिक जाल. कई दूसरे इलाकों में इनमें से एक या ज्यादा तत्व मौजूद नहीं थे. बस यही वजह है कि वहां बड़े तेल भंडार नहीं बन पाए.

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