US Troops: अमेरिका ने जर्मनी से लगभग 5000 सैनिक वापस बुलाने का फैसला किया है. इस प्रक्रिया के अगले 6 से 12 महीने में पूरी होने की उम्मीद है. पेंटागन ने इस बात की पुष्टि की है कि यह कदम सैन्य जरूरत और यूरोप में बदलती सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद उठाया गया है.  जैसे-जैसे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा होता है कि दुनिया भर में अमेरिकी सैनिक और कहां-कहां तैनात हैं और जर्मनी में उनकी मौजूदगी कितनी जरूरी है? आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब.

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अमेरिकी सैन्य रणनीति में जर्मनी की भूमिका 

जर्मनी लंबे समय से यूरोप में अमेरिकी सेना के लिए सबसे जरूरी केंद्रों में से एक रहा है. फिलहाल वहां लगभग 36000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं जो इसे विदेश में सबसे बड़ी तैनाती में से एक बनाता है.  ऐसा कहा जा रहा है कि इस कुल सैन्य बल का लगभग 14% हिस्सा वापस मंगाया जाएगा. यह देश रामस्टीन एयर बेस जैसे जरूरी बुनियादी ढांचे का मेजबान है.

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इसके अलावा जर्मनी में अमेरिकी यूरोपीय कमान और अमेरिकी अफ्रीका कमान का मुख्यालय है. इसी के साथ अमेरिका के बाहर सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य अस्पताल भी यहीं पर स्थित है. 

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दुनिया भर में अमेरिकी सैनिक और कहां-कहां तैनात हैं? 

जर्मनी के अलावा अमेरिका कई प्रमुख क्षेत्रों में अपनी मजबूत सैन्य उपस्थिति बनाए हुए है. सबसे बड़ी सैन्य टुकड़ी जापान में तैनात है. यहां लगभग 54000 से 61000 सैनिक तैनात हैं. दक्षिण कोरिया में लगभग 23000 से 26000 सैनिक मौजूद हैं. इसी के साथ इटली में 12000 से 15000 सैनिक तैनात हैं. वहीं यूनाइटेड किंगडम की बात करें तो यहां लगभग 10000 से 11000 अमेरिकी कर्मी तैनात हैं. 

मिडिल ईस्ट में भारी उपस्थिति 

मिडिल ईस्ट अमेरिकी सैन्य तैनाती के लिए सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक बना हुआ है.  कतर, बहरीन, कुवैत और इराक जैसे देशों में लगभग 50000 सैनिक तैनात हैं. 

बड़े केंद्रों के अलावा अमेरिका ने स्पेन में लगभग 4000 सैनिक, तुर्की में 1700 सैनिक और बेल्जियम में 1100 सैनिक तैनात किए हुए हैं. इस कदम को अमेरिका की रणनीति में आए एक बड़े बदलाव के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है. यूरोप में अपनी सैन्य मौजूदगी को कम करके अमेरिका इस बात का संकेत दे रहा है कि यूरोपीय देश को अपनी सुरक्षा की ज्यादा जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए. दरअसल नाटो देशों में पहले से ही इस फैसले को लेकर काफी चिंता थी. अब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में सुरक्षा का मुद्दा और भी ज्यादा गंभीर होता नजर आ रहा है.

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