TARA System: भारत का डिफेंस आधुनिकीकरण काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है. हाल ही में जिस चीज ने सबका ध्यान खींचा है वह है टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑग्मेंटेशन (TARA) स्मार्ट ग्लाइड बॉम्ब किट. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित यह सिस्टम पारंपरिक बमों को सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों में बदलने के लिए बनाया गया है. हाल ही में इसका सफल परीक्षण किया गया है. 

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क्या है TARA सिस्टम? 

TARA डिफेंस सेक्टर में भारत की आत्मनिर्भरता पहल के तहत विकसित एक स्मार्ट ग्लाइड बॉम्ब किट है. पूरी तरह से नई मिसाइल बनाने की बजाय इस किट को मौजूदा पारंपरिक बमों के साथ जोड़ा जा सकता है. इसके बाद वे सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों में बदल जाते हैं और जबरदस्त सटीकता के साथ लक्ष्यों को भेद सकते हैं.

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चीन और पाकिस्तान के लिए बड़ा खतरा? 

TARA का सबसे बड़ा फायदा इसकी स्टैंड-ऑफ अटैक क्षमता है. लड़ाकू विमान दुश्मन के एयर डिफेंस जोन में दाखिल हुए बिना सुरक्षित दूरी से इस हथियार को छोड़ सकते हैं. सुखोई, तेजस और जगुआर जैसे विमान दुश्मन के राडार और मिसाइल सिस्टम से दूर रहते हुए भी इन ग्लाइड बम को लॉन्च कर सकते हैं. 

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साधारण बमों को स्मार्ट हथियार में बदलना 

TARA किट को वायुसेना के पास पहले से मौजूद अनगाइडेड बमों को अपग्रेड करने के लिए डिजाइन किया गया है. विंग्स, कंट्रोल सरफेस और एडवांस्ड नेविगेशन सिस्टम जोड़कर पारंपरिक बमों को काफी सटीक स्मार्ट हथियारों में बदला जा सकता है. 

लंबी दूरी तक सटीक निशाना लगाने की क्षमता 

TARA से लैस बम 80 से 100 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्यों की तरफ ग्लाइड कर सकते हैं. अनुकूल परिस्थितियों में इसकी रेंज लगभग 150 किलोमीटर तक बढ़ सकती है. इसी के साथ यह सिस्टम जीपीएस और भारत के NAVIC नेटवर्क के जरिए सैटेलाइट बेस्ड नेविगेशन और एडवांस्ड इलेक्ट्रो ऑप्टिकल गाइडेंस का इस्तेमाल करता है.

इसी के साथ TARA का माड्यूलर डिजाइन इसे अलग-अलग वजन वाले, जैसे 250 किलो, 450 किलो, और 500 किलो क्लास के बमों के साथ इस्तेमाल करने की सुविधा देता है. यह लचीलापन कमांडरों को लक्ष्य की प्रकृति और मिशन की जरूरत के आधार पर हमले करने में कई ऑप्शन देता है. TARA का विकास आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत स्वदेशी रक्षा निर्माण की दिशा में भारत के बड़े प्रयासों को दिखाता है.

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