आपने कई बार वीडियो या मेलों में देखा होगा कि कुछ लोग बिना डरे अपना हाथ खौलते हुए तेल में डाल देते हैं और उन्हें कोई जलन तक महसूस नहीं होती. यह देखकर लगता है जैसे उनके पास कोई जादुई ताकत हो, लेकिन असल में इसके पीछे कोई चमत्कार नहीं बल्कि विज्ञान का एक दिलचस्प नियम काम करता है. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी कि आखिर ऐसा क्यों होता है.
लाइडेनफ्रॉस्ट इफेक्ट है असली वजह
इस पूरे खेल के पीछे का साइंस एक फिजिक्स की घटना है जिसे लाइडेनफ्रॉस्ट इफेक्ट कहते हैं. यह नाम एक जर्मन डॉक्टर के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने सबसे पहले सन 1756 में इसके बारे में बताया था. इसका सीधा मतलब यह है कि जब कोई तरल पदार्थ किसी बहुत गर्म सतह के संपर्क में आता है जो उसके उबलने के तापमान से काफी ज्यादा गर्म होती है, तो उस तरल की एक पतली परत तुरंत भाप बनकर एक सुरक्षा कवच जैसी लेयर बना देती है. जब कोई व्यक्ति अपना हाथ खौलते तेल में डालने से पहले उसे पानी में गीला कर लेता है, तो हाथ की नमी तेल के संपर्क में आते ही बहुत तेजी से भाप बनकर उड़ने लगती है. यह भाप की पतली परत हाथ और गर्म तेल के बीच एक ढाल की तरह काम करती है, जिससे गर्मी सीधे त्वचा तक नहीं पहुंच पाती और कुछ पलों के लिए जलन महसूस नहीं होती.
इस पूरे करतब में समय की भूमिका सबसे ज्यादा अहम होती है. हाथ को तेल में सिर्फ बहुत कम समय के लिए, यानी एक सेकंड से भी कम समय के लिए डुबोया जाता है और तुरंत बाहर निकाल लिया जाता है. इतने कम समय में गर्मी त्वचा तक पहुंचने का मौका ही नहीं मिल पाता. अगर हाथ को तेल में थोड़ी देर और रोक दिया जाए या तेल में पहले से मौजूद कोई नमी वाली चीज हाथ पर लग जाए, तो यह सुरक्षा तुरंत खत्म हो सकती है और हाथ जल जाता है.
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क्या यह हर किसी के लिए सुरक्षित है?
यह समझना बहुत जरूरी है कि यह कोई सुरक्षित तरीका नहीं है, बल्कि एक खतरनाक काम है जिसमें जरा सी चूक होने पर गंभीर रूप से जलने का खतरा बना रहता है. इसे बिना जानकारी और अभ्यास के कभी भी घर पर आजमाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. साथ ही यह असर सिर्फ नमी और सही समय पर निर्भर करता है, न कि किसी व्यक्ति की खास ताकत या शक्ति पर.
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