Highways Toll Charge News: हाल के दिनों में कई नए बनाए गए राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के तुरंत बाद धंसने, गड्ढे होने और जलभराव होने खबरें सामने आईं.

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समय से पहले ही सड़कों के खराब हो जाने, उन पर पहियों के निशान (रटिंग) और दूसरी कमियों को देखते हुए भारत सरकार (सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय) अब उद्घाटन से पहले 2-3 महीने का ट्रायल रन या रोड टेस्ट करने की योजना बना रही है. इस दौरान वाहनों से कोई टोल नहीं वसूला जाएगा. इसका मतलब औपचारिक शुरुआत से पहले सड़कों की खामियों का पता लगाया जाएगा और उन्हें दूर किया जाएगा. 

क्यों सरकार ने लिया यह फैसला?

हाल ही में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे और देहरादून एक्सप्रेसवे जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट्स में उद्घाटन के तुरंत बाद कमियां देखने को मिली थीं. सरकार का मानना है कि उद्घाटन के बाद जनता को दिक्क्तें होना और उस पर से उनसे टोल वसूला जाना गलत है इसलिए अब कॉन्ट्रैक्टर्स और कंसल्टेंट्स की जवाबदेही तय करने के लिए पहले सड़क का रोड टेस्ट होगा. इस 2-3 महीने के ट्रायल रन के दौरान अगर सड़कें धंसती हैं या जल निकासी की समस्या आती है या गड्ढे होते हैं, तो ठेकेदार को अपने पैसों से इसे ठीक कराना होगा.

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नहीं देना होगा टोल

जब तक हाईवे पूरी तरह टेस्ट में पास नहीं हो जाता और उसका उद्घाटन नहीं हो जाता, तब तक उस स्ट्रेच पर लोगों से टोल नहीं वसूला जाएगा. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने कहा, "लंबे समय तक ट्रायल रन करना अच्छा है क्योंकि इससे किसी भी हिस्से में जमीन धंसने, सड़क पर गड्ढे बनने या ड्रेनेज की समस्या का पता लगाकर उसे ठीक किया जा सकता है, खासकर मॉनसून के मौसम में."

सरकार ने इस नीति को गंभीरता से लेते हुए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे पर टोल टैक्स की वसूली को पूरी तरह से सस्पेंड कर दिया है. इस कॉरिडोर में निर्माण कार्यों में खराबी और बारिश में बार-बार सड़क धंसने के बाद यह कदम उठाया गया. अब जब तक एक्सप्रेसवे पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाता, तब तक लोगों से कोई टोल नहीं लिया जाएगा.

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