डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के दौरान भी ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की बात कर चुके हैं. हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और बयानबाजी के बीच उनकी टीम ने इस मुद्दे को दोबारा उछाला है. हालांकि यह साफ करना जरूरी है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है और किसी भी तरह का कब्जा अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ होगा. लेकिन अगर अमेरिका, वेनेजुएला की तरह ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेता है तो आखिर उसको कितना फायदा होगा और अमेरिका की कमाई कितनी बढ़ जाएगी.

Continues below advertisement

ग्रीनलैंड की भौगोलिक और रणनीतिक अहमियत

ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, लेकिन यहां की आबादी बेहद कम है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी लोकेशन है. यह आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है, जहां से उत्तरी अमेरिका, यूरोप और रूस तीनों पर नजर रखी जा सकती है. अमेरिका पहले से ही यहां थुले एयर बेस के जरिए सैन्य मौजूदगी रखता है, जो मिसाइल चेतावनी और अंतरिक्ष निगरानी में अहम भूमिका निभाता है.

Continues below advertisement

दुर्लभ खनिजों से तगड़ी कमाई

ग्रीनलैंड में Rare Earth Elements यानी दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार माने जाते हैं. इन खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक कार, मोबाइल फोन, विंड टर्बाइन, सेमीकंडक्टर और आधुनिक हथियारों में होता है. रिपोर्ट्स की मानें तो अगर इन संसाधनों का बड़े पैमाने पर व्यावसायिक दोहन हो, तो लंबी अवधि में सैकड़ों अरब डॉलर का आर्थिक मूल्य निकल सकता है. हालांकि यह कमाई एक-दो साल में नहीं, बल्कि कई दशकों में संभव मानी जा सकती है.

तेल और गैस का छिपा खजाना

आर्कटिक क्षेत्र में तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार होने की संभावना लंबे समय से जताई जाती रही है. ग्रीनलैंड के आसपास भी ऐसे संकेत मिले हैं. अगर अमेरिका को इन संसाधनों तक सीधी पहुंच मिलती है, तो ऊर्जा क्षेत्र में उसे हर साल कई अरब डॉलर की संभावित आमदनी हो सकती है. हालांकि आर्कटिक में ड्रिलिंग बेहद महंगी है और पर्यावरणीय नियमों के कारण इस पर कड़ा विरोध भी होता है.

नए शिपिंग रूट और व्यापार

जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक में बर्फ तेजी से पिघल रही है. इससे नए समुद्री व्यापार मार्ग खुल रहे हैं, जो एशिया और यूरोप के बीच दूरी कम कर सकते हैं. अगर अमेरिका का ग्रीनलैंड पर प्रभाव बढ़ता, तो वह इन रूट्स से गुजरने वाले व्यापार पर असर डाल सकता था. बंदरगाह शुल्क, लॉजिस्टिक्स और सेवाओं के जरिए अरबों डॉलर सालाना की अप्रत्यक्ष कमाई संभव मानी जाती है.

खर्च और जोखिम भी समझना जरूरी

यह मान लेना गलत होगा कि ग्रीनलैंड सिर्फ कमाई का जरिया बनेगा. वहां सड़क, बंदरगाह, ऊर्जा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक ढांचा खड़ा करना बेहद महंगा है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि शुरुआती दौर में अमेरिका को दसियों अरब डॉलर का निवेश करना पड़ सकता है. इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आबादी के अधिकार भी बड़ी चुनौती होंगे.

कुल मिलाकर आर्थिक तस्वीर

अगर सब कुछ जोड़कर देखा जाए, तो खनिज और संसाधनों से सैकड़ों अरब डॉलर का संभावित मूल्य, तेल, गैस और शिपिंग से हर साल अरबों डॉलर की संभावना और रणनीतिक बढ़त से अप्रत्यक्ष आर्थिक फायदा होगा, लेकिन यह सब लंबी अवधि, भारी निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहमति के बिना संभव नहीं है.

यह भी पढ़ें: भारत से अगर जाएं वेनेजुएला तो कितने देशों का पार करना होगा एयर स्पेस, इसमें कितना आएगा खर्चा?