फ्लाइट में सफर के दौरान अक्सर यात्री टेक ऑफ और लैंडिंग के समय केबिन क्रु की एक्टिविटी पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैंं, लेकिन अगर गौर करें तो जैसे ही प्लेन टेक ऑफ या लैंडिंग की तैयारी करता है, क्रू मेंबर अपनी जंप सीट पर एक खास पोजीशन में बैठ जाते हैं. उनकी खास पोजीशन में पीठ सीधी रहती है, पैर जमीन पर टिके हुए और हाथ जांघों के नीचे दबे हुए रहते हैं. पहली नजर में यह एक नॉर्मल आदत जैसी लगती है, लेकिन इसके पीछे बहुत गहरी सुरक्षा ट्रेनिंग और सख्त नियम जुड़े होते हैं. दरअसल यह पोजीशन सिर्फ बैठने का तरीका नहीं, बल्कि फ्लाइट सेफ्टी का अहम हिस्सा है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि फ्लाइट में टेक ऑफ और लैंडिंग के दौरान क्रू मेंबर हाथ जांघों के नीचे क्यों रखते हैं.
क्रू मेंबर क्यों रखते हैं जांघों के नीचे हाथ?
फ्लाइट में टेक ऑफ-लैंडिंग के दौरान क्रू मेंबर के हाथ जांघों के नीचे रखना फ्लाइट सेफ्टी का अहम हिस्सा होता है. जिसे ब्रेस पोजीशन कहा जाता है. वहीं ब्रेस पोजीशन एक खास तरह की सुरक्षा पोजीशन होती है, जिसे फ्लाइट के सबसे खतरे वाले पॉइंट यानी टेक ऑफ-लैंडिंग के दौरान अपनाया जाता है. इसमें क्रू मेंबर अपनी पीठ सीट से सटाकर रखते हैं, पैर जमीन पर मजबूती से टिके होते हैं और हाथ जांघों के नीचे रखे जाते हैं. इसका मकसद शरीर को स्थिर रखना होता है, ताकि अचानक झटका लगने या आपात इमरजेंसी में चोट लगने का खतरा कम हो सके.
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हाथ जांघों के नीचे रखने का कारण
हाथों को जांघों के नीचे रखने के पीछे सबसे बड़ा कारण उन्हें कंट्रोल रखना होता है. अगर अचानक तेज झटका लगे या टर्बूलेंस हो तो हाथ ऊपर या बाहर की तरफ तेजी से जा सकते हैं, जिससे चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है. इस पोजीशन में हाथ दबे रहने से उनका मूवमेंट काम होता है और शरीर संतुलित बना रहता है. खासतौर पर रीढ और हाथों को सुरक्षित रखने में यह तरीका मददगार माना जाता है. जहां यात्रियों को इमरजेंसी में झुककर बैठने की सलाह दी जाती है, वहीं क्रू मेंबर को सीधा बैठना होता है. इसकी वजह यह है कि उन्हें किसी भी कंडीशन में तुरंत कार्रवाई करनी पड़ सकती है. जैसे इमरजेंसी एग्जिट खोलना, यात्रियों को बाहर निकलना या घायल लोगों की मदद करना. ऐसे में हाथों को जांघों के नीचे रखने से वह खुद को स्थिर रखते हुए तुरंत एक्शन लेने के लिए तैयार रहते हैं.
साइलेंट रिव्यू भी होता है जरूरी
इस दौरान क्रू मेंबर सिर्फ फिजिकली रूप से ही नहीं बल्कि मेंटल रूप से भी तैयार रहते हैं. वह चुपचाप अपने दिमाग में इमरजेंसी प्रक्रियाओं को दोहराते रहते हैं जैसे एग्जिट गेट की लोकेशन, यात्रियों को दिए जाने वाले निर्देश और किसी हादसे की स्थिति में उठाए जाने वाले कदम. वहीं इस पूरी प्रक्रिया को साइलेंट रिव्यू कहा जाता है जो उनकी ट्रेनिंग का एक जरूरी हिस्सा होता है. क्रू मेंबर का यह तरीका भले ही नॉर्मल लगे, लेकिन इसके पीछे यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी बड़ी सोच काम करती है.
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