मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण एलपीजी गैस को लेकर देश भर में हजारों लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है. कई लोगों का कहना है कि वह पिछले कुछ समय से कई दिनों से गैस भरवाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कई जगह पर स्टॉक ही खत्म बताया जा रहा है. वहीं कई जगहों पर उपभोक्ताओं ने देरी से डिलीवरी और लंबित बुकिंग की शिकायत भी की है. ऐसे माहौल में केंद्र सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी से जुड़े नियमों को स्पष्ट करते हुए कहा कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को घबराकर एक्स्ट्रा बुकिंग करने की जरूरत नहीं है.

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सरकार का कहना है कि हाल के दिनों में कई उपभोक्ताओं ने जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक करने शुरू कर दिए हैं, जिससे सप्लाई सिस्टम पर दबाव बढ़ गया है. इस स्थिति को नियंत्रित करने और गैस की आपूर्ति सभी तक समान रूप से पहुंचाने के लिए बुकिंग अंतराल और डिलीवरी प्रक्रिया में कुछ बदलाव किए गए हैं. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि एलपीजी सिलेंडर बुक होने के कितने दिन बाद डिलीवरी हो जानी चाहिए और इसे लेकर सरकार के नियम क्या है. ये भी पढ़ें-खो गया है वोटर आइडी कार्ड तो कैसे डाल सकते हैं वोट, कौन से डॉक्यूमेंट हैं मान्य?

बुकिंग के बीच तय किया गया अंतराल नए नियमों के अनुसार, अब एक सिलेंडर मिलने के तुरंत बाद दूसरा सिलेंडर बुक नहीं किया जा सकेगा. सरकार ने बुकिंग के बीच न्यूनतम समय तय कर दिया है. शहरी क्षेत्र में उपभोक्ताओं को पिछले सिलेंडर की डिलीवरी मिलने के बाद कम से कम 25 दिन का इंतजार करना होगा. तभी अगला सिलेंडर बुक किया जाएगा. वहीं ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में यह अवधि और ज्यादा रखी गई है. ऐसे क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को 45 दिन बाद ही नया सिलेंडर बुक करने की अनुमति होगी. सरकार का कहना है कि इससे एक ही परिवार की ओर से बार-बार बुकिंग कर गैस जमा करने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और सप्लाई सभी उपभोक्ताओं तक सही तरीके से पहुंच सकेगी. बुकिंग के बाद कितने दिन में मिलना चाहिए सिलेंडर? सरकारी अधिकारियों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में सिलेंडर की बुकिंग के बाद 2 से 3 दिन के अंदर डिलीवरी हो जानी चाहिए. हालांकि कुछ क्षेत्रों में मांग बढ़ने या तकनीकी दिक्कतों के कारण थोड़ी देरी हो सकती है. वहीं पिछले कुछ दिनों में कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि सिलेंडर की डिलीवरी में कम से एक सप्ताह तक का समय लग रहा है या बुकिंग लंबित दिखाई दे रही है. इसे लेकर अधिकारों का कहना है कि अचानक बढ़ी बुकिंग और सर्वर पर ज्यादा दबाव की वजह से कुछ जगह पर ऐसी कंडीशन बनी है, जिसे धीरे-धीरे सामान्य किया जा रहा है. डिलीवरी के समय अब ओटीपी भी जरूरी गैस वितरण व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए डिलीवरी प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है और ज्यादातर क्षेत्रों में गैस सिलेंडर डिलीवरी के समय ओटीपी आधारित सत्यापन लागू किया गया है. इस प्रक्रिया में जब डिलीवरी कर्मी सिलेंडर लेकर उपभोक्ताओं के घर पहुंचेगा, तब रजिस्टर मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाएगा. उपभोक्ताओं को वह ओटीपी डिलीवरी कर्मी को बताना होगा, इसके बाद ही सिस्टम में डिलीवरी पूरी मानी जाएगी. बिना ओटीपी के सिलेंडर के डिलीवरी दर्ज नहीं की जाएगी. अधिकारियों के अनुसार यह व्यवस्था गलत डिलीवरी, फर्जी एंट्री और वितरण प्रक्रिया में गड़बड़ी जैसी समस्याओं को रोकने के लिए लागू की गई है.

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