Traffic Lights: हर दिन दुनिया भर में अरबों लोग एक ही आसान ट्रैफिक नियम का पालन करते हैं. लाल बत्ती पर रुकना, हरी बत्ती पर चलना और पीली बत्ती पर तैयार हो जाना. ये रंग आधुनिक जीवन का इतना स्वाभाविक हिस्सा बन गए हैं कि ज्यादातर लोग कभी रुककर यह नहीं सोचते कि आखिर इन्हें ही क्यों चुना गया था. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

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सबसे पहले रंगीन सिग्नल पेश किए गए 

आधुनिक ट्रैफिक सिग्नलिंग की शुरुआत 1830 और 1840 के दशक में ब्रिटिश रेलवे कंपनियों से मानी जा सकती है. शुरुआती रेलवे को ट्रेन ड्राइवरों से संपर्क करने और व्यस्त पटरियों पर टक्करों को रोकने के लिए एक भरोसेमंद प्रणाली की जरूरत थी. इन सिग्नलिंग विचारों को विकसित करने में शामिल प्रमुख लोगों में से एक हेनरी बूथ थे. वे लिवरपूल और मैनचेस्टर रेलवे से जुड़े एक इंजीनियर थे. उस समय रेलवे सिग्नलिंग के लिए तीन रंगों का इस्तेमाल किया जाता था. लाल का मतलब था खतरा या फिर रुकना, हरे का मतलब था सावधानी, सफेद का मतलब था सुरक्षित या फिर आगे बढ़ना. 

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आगे बढ़ो सिग्नल के तौर पर सफेद रंग के शुरुआती इस्तेमाल से आखिरकार रात में ट्रेन ड्राइवर के लिए एक खतरनाक भ्रम पैदा हो गया. रेलवे ऑपरेटरों ने पाया कि अंधेरे में सफेद सिग्नल की बत्तियों को आसानी से तारे या फिर दूसरी दूर की रोशनी समझा जा सकता था. एक बड़ी घटना में रेलवे सिग्नल पर लगा लाल कांच का लेंस कथित तौर पर टूटकर गिर गया जिससे उसके पीछे लगा सफेद लैंप दिखाई देने लगा. ट्रेन ड्राइवर ने गलती से सफेद रोशनी को इस बात का संकेत समझा की पटरी साफ है और आगे बढ़ाना सुरक्षित. इस गलतफहमी की वजह से ट्रेनों की टक्कर हो गई. इस दुर्घटना के बाद रेलवे अधिकारियों ने सफेद रंग को हटाकर हरे रंग को चुन लिया. साथ ही पीला रंग नया सावधानी सिग्नल बन गया.

दुनिया की पहली ट्रैफिक लाइट 

ट्रेन से शुरू हुई यह व्यवस्था ट्रैफिक लाइटों की नींव बनी. इतिहास का पहला सड़क ट्रैफिक सिग्नल 10 दिसंबर 1868 को लंदन में संसद भवन के बाहर लगाया गया था. इस सिस्टम को जॉन पिक नाइट ने डिजाइन किया था. उन्होंने सड़क यातायात प्रबंधन के लिए रेलवे सिग्नलिंग के कांसेप्ट को अपनाया था. शुरुआत में इसका गैस वर्जन तैयार किया गया था और सिर्फ लाल और हरे लैंप का इस्तेमाल होता था. एक पुलिस अधिकारी घोड़ों की गाड़ियों और पैदल चलने वालों को कंट्रोल करने के लिए इन सिग्नलों को हाथ से चलाता था. 

इलेक्ट्रिक ट्रैफिक लाइट 

अगली बड़ी सफलता 1912 में मिली जब लेस्टर वायर ने संयुक्त राज्य अमेरिका में पहली इलेक्ट्रिक ट्रैफिक लाइट बनाई. बाद में 1920 में एक और अमेरिकी पुलिस अधिकारी विलियम पॉट्स ने लाल और हरे रंग के बीच आधिकारिक तौर पर पीले या फिर एम्बर सिग्नल को जोड़कर आधुनिक तीन रंगों वाली ट्रैफिक लाइट प्रणाली पेश की.

रुकने के लिए लाल रंग को ही क्यों चुना गया? 

रुकने वाले सिग्नलों के लिए लाल रंग को चुनना एक वैज्ञानिक कारण था. दृश्य रंग स्पेक्ट्रम में लाल रोशनी की वेवलेंथ सबसे लंबी होती है. यह लगभग 620 से 740 नैनोमीटर के बीच होती है. इस लंबी वेवलेंथ की वजह से लाल रोशनी धूल, कोहरे, धुएं और बारिश में कम बिखरती है. मनोवैज्ञानिक रूप से भी इंसान स्वाभाविक रूप से लाल रंग को खतरे, सावधानी और आपातकाल से जोड़ते हैं. 

हरे रंग का मतलब आगे बढ़ना ही क्यों होता है? 

हरे रंग को इसलिए चुना गया क्योंकि इंसानी आंखें हरे रंग की वेवलेंथ के प्रति काफी ज्यादा संवेदनशील होती हैं. यह लगभग 500 से 565 नैनोमीटर के बीच होती है. यह संवेदनशीलता लोगों को दिन और रात दोनों समय हरे सिग्नल को जल्दी पहचान में मदद करती है.

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