अक्सर जब लोग लंबी दूरी की फ्लाइट में सफर करते हैं, तो समय बिताने या अच्छी नींद लेने के लिए वाइन या अन्य शराब का सेवन कर लेते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जमीन पर दो-तीन पेग पीने के बाद भी जो नशा नहीं होता, वह सिर्फ फ्लाइट के अंदर एक ग्लास में ही कैसे होने लगता है. कई लोग इसे केवल एक वहम मानते हैं, लेकिन साइंस इसे कोई अफवाह नहीं मानता. आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है. 

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फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के प्रयोगों के मुताबिक, शराब को शरीर में तोड़ने वाला लिवर एंजाइम अल्कोहल डिहाइड्रोजनेज ऊंचाई पर भी उसी रफ्तार से काम करता है, जैसे जमीन पर करता है. ब्लड में अल्कोहल की मात्रा एक जैसी ही रहती है, चाहे आप जमीन पर हों या 35 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भर रहे विमान में. इसलिए यह कहना गलत होगा कि हवा में एक ड्रिंक, जमीन पर कई ड्रिंक के बराबर हो जाता है. 

केबिन प्रेशर बनता है असली वजह

हवाई जहाज के केबिन को पूरी तरह जमीन जैसा प्रेशर नहीं दिया जाता, बल्कि यह करीब 6,000 से 8,000 फीट की ऊंचाई जितना ही रखा जाता है, जो लगभग किसी पहाड़ी शहर की स्थिति के बराबर है. इस कम प्रेशर की वजह से खून में ऑक्सीजन की मात्रा हल्की हो जाती है, जिसे हल्का हाइकोक्सिया कहा जाता है. दिलचस्प बात यह है कि शराब खुद भी शरीर में ऑक्सीजन के अवशोषण को कुछ हद तक बाधित करती है, इसलिए जब यह दोनों चीजें एक साथ होती हैं, तो दिमाग को दोहरी मार झेलनी पड़ती है, जिससे चक्कर आना, हल्कापन और असंतुलन जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं. 

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सूखी हवा से बढ़ती है डिहाइड्रेशन

फ्लाइट के केबिन में नमी का स्तर 10 से 20 प्रतिशत तक ही रहता है, जो किसी रेगिस्तान से भी कम होता है. इतनी सूखी हवा में सांस लेने से त्वचा के जरिए शरीर से पानी तेजी से कम होने लगता है. शराब खूद एक डाययूरेटिक पदार्थ होती है, जो पेशाब के जरिए शरीर से और ज्यादा पानी निकाल देती है. इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे खून में अल्कोहल की सघनता अपेक्षाकृत बढ़ जाती है, जिससे नशे का अहसास होना और तेज हो जाता है. 

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दिमाग पर पड़ता है दोहरा असर 

रिसर्च के मुताबिक कम ऑक्सीजन वाला माहौल दिमाग के उस हिस्से को ज्यादा प्रभावित करता है, जो फैसले लेने, याददाश्त और आत्म-नियंत्रण को संभालता है. शराब जो असर दिमाग पर डालती है, वह हल्के हाइपोक्सिया की मौजूदगी में और बढ़ जाता है, जिससे दिमाग को खुद को संभालने के लिए कम समय मिलता है. यही वजह है कि एक जैसी मात्रा मे शराब पीने पर भी हवा में जमीन के मुकाबले कहीं ज्यादा नशा और सुस्ती महसूस होती है. 

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