Airplane Lights: जब भी आप किसी अंधेरी रात में आसमान की तरफ देखते हैं तो हवाई जहाज पर लगी छोटी-छोटी टिमटिमाती लाइटें सिर्फ सजावटी लग सकती हैं. लेकिन ये लाल, हरी और पीली लाइट सजावटी नहीं होती बल्कि उनकी काफी अहम भूमिका है. इन लाइट्स को नेविगेशन या फिर पोजिशन लाइट्स के नाम से पहचाना जाता है. यह लाइट्स पायलट, हवाई यातायात नियंत्रक और यहां तक की बाकी विमानों को विमान की दिशा और गति पता लगाने में मदद करती हैं. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.

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क्यों है यह जरूरी 

दुनिया का हर विमान एक सख्त और मानकीकृत प्रकाश व्यवस्था का पालन करता है.   एफएए और आईसीएओ जैसे विमान प्राधिकरण इन रोशनी को जरूरी बनाते हैं ताकि पायलट अंधेरे में दूरी, दिशा और गति का अंदाजा लगा सकें. अगर ये लाइट्स ना हों तो आसमान में विमानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा.

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लाल और हरी लाइटें पंखों पर क्यों लगाई जाती हैं

लाल लाइट हमेशा बाएं विंगटिप पर होती है जबकि हरि लाइट दाएं विंगटिप पर. दरअसल यह विमान में ट्रैफिक सिग्नल दर्शाते हैं. लेकिन यह विमान के रुकने या आगे बढ़ने के संकेत नहीं देते बल्कि दिशा बताते हैं. इन लाइट्स की मदद से हर व्यक्ति चाहे वह रनवे पर हो, नियंत्रण टावर में हो या फिर किसी दूसरी कॉकपिट में हो, एक नजर में ही आने-जाने वाले विमान की पहचान कर सकता है.

लाइटें दिशा पहचान में कैसे मदद करती हैं

यह नेविगेशन लाइट आकाश में कंपास की तरह काम करती हैं. अगर किसी को एक साथ लाल और हरी दोनों लाइट दिखाई दें इसका मतलब है कि विमान सीधे उनकी तरफ उड़ रहा है. अगर सिर्फ लाल लाइट दिखाई दे रही है तो विमान दाएं से बाएं की तरफ बढ़ रहा है. अगर सिर्फ हरा रंग दिखाई दे तो विमान बाएं से दाएं की तरफ जा रहा है. इसके अलावा एक चमकदार सफेद टेल लाइट होती है जो मौसम या फिर कोण के आधार पर पीली दिखने लगती है. विमान आमतौर पर सफेद स्ट्रोब लाइट का इस्तेमाल करते हैं. यह लाइट समय समय पर चमकती रहती है जिस अंधेरे आसमान में विमान को पहचानना आसान हो जाता है. विमान चाहे अमेरिकी हो, भारतीय हो या फिर ऑस्ट्रेलियाई हो प्रकाश व्यवस्था के नियम सभी के लिए एक जैसे रहते हैं. यह लाइटें टकराव को रोकती हैं, नेविगेशन में मदद करती हैं और साथ ही ग्राउंड स्टाफ को भी सतर्क करती हैं.

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