Aya Ram Gaya Ram Phrase Origin: भारतीय राजनीति में कई बार छोटे-छोटे वाक्य भी बड़े रूप ले लेते हैं और वह इतिहास में दर्ज हो जाते हैं. ऐसे ही भारतीय राजनीति में जब कोई नेता बार-बार पार्टी बदलता हैं तो उसके लिए अक्सर एक मुहावरा इस्तेमाल किया जाता है आया राम गया राम. समय के साथ यह मुहावरा इतना लोकप्रिय हो चुका है कि यह दल-बदल की राजनीति का पर्याय बन गया है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसके पीछे एक असली नेता की कहानी भी छिपी हुई है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि आया राम गया राम मुहावरा तो आपने सुना होगा, लेकिन यह किस विधायक के लिए बना था.
किस विधायक के लिए बना, आया राम गया राम मुहावरा
यह कहानी हरियाणा के विधायक गया लाल की है, जिनके राजनीतिक फैसलों ने भारतीय राजनीति को एक नया मुहावरा दे दिया. दरअसल 1 नवंबर 1966 को पंजाब से अलग होकर हरियाणा एक नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया. इसके बाद 1967 में राज्य का पहला विधानसभा चुनाव आयोजित किया गया. इस चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसे 81 में से 48 सीट मिली. इस चुनाव में हसनपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार गया लाल भी जीतकर विधानसभा पहुंचे. उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह विधायक आगे चलकर भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हो जाएगा.
एक हफ्ते में बदल गया पूरा राजनीतिक समीकरण
चुनाव के बाद कांग्रेस नेता भगवत दयाल शर्मा ने 10 मार्च 1967 को हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. लेकिन उनकी सरकार ज्यादा समय तक नहीं चल सकी. कांग्रेस के कई विधायक बगावत पर उतर आए और कुछ निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर नया राजनीतिक मोर्चा बना लिया. उस दौर में दल-बदल का सिलसिला तेजी से चल रहा था. विधायक लगातार एक गुट से दूसरे गुट में जा रहे थे, इसी राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच गया लाल सबसे ज्यादा चर्चा में आए. गया लाल ने ऐसा राजनीतिक कदम उठाया, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी और खींच लिया. बताया जाता है कि उन्होंने महज 9 घंटे के अंदर कई बार अपना राजनीतिक पाला बदला. पहले एक गुट में शामिल हुए फिर वहां से निकलकर दूसरे गुट में चले गए और बाद में फिर वापसी कर ली. उस समय हरियाणा में सरकार बनाने और गिराने की कवायद चल रही थी. इसलिए हर विधायक की अहमियत बढ़ गई थी. गया लाल के लगातार बदलते रुख ने राजनीतिक हलकों में सनसनी मचा दी थी.
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ऐसे पड़ा आया राम गया राम नाम
24 मार्च 1967 को संयुक्त विधायक दल के नेता राव बीरेंद्र सिंह हरियाणा के मुख्यमंत्री बने. इस दौरान जब गया लाल फिर से उनके गुट में लौटे तो चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राव बीरेंद्र सिंह ने पत्रकारों से कहा गया राम अब आया राम है. यहीं से आया राम गया राम वाक्य की शुरुआत हुई. बाद में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री वाई बी. चव्हाण ने भी संसद में इस शब्द का इस्तेमाल किया. बाद में यह मुहावरा पूरे देश में लोकप्रिय हो गया और दल-बदल करने वाले नेताओं की पहचान बन गया.
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