Venus Volcanoes: जब हम ज्वालामुखियों के बारे में सोचते हैं तो आमतौर पर हमारे मन में पृथ्वी का ही ख्याल आता है. लेकिन असल में हमारा ग्रह इस मामले में सबसे आगे रहने वाले ग्रह के आसपास भी नहीं है. सौरमंडल में सबसे ज्यादा ज्वालामुखियों का खिताब शुक्र ग्रह के नाम है. इस ग्रह को अक्सर पृथ्वी का जुड़वां कहा जाता है. यह ग्रह एक अजूबे से कम नहीं है. 

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इस ग्रह पर कितनी ज्वालामुखी 

वैज्ञानिकों ने शुक्र पर पहले ही 1600 से ज्यादा बड़े ज्वालामुखी और ज्वालामुखी संरचनाएं खोज ली हैं. ये कोई छोटी-मोटी आकृतियां नहीं हैं बल्कि काफी बड़ी भूवैज्ञानिक संरचनाएं हैं और पूरे ग्रह पर फैली हुई हैं. 

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ज्वालामुखियों की कुल संख्या 10 लाख से ज्यादा 

जब छोटे ज्वालामुखियों को भी शामिल किया जाता है तो अनुमान बताते हैं कि शुक्र पर एक लाख से लेकर 10 लाख से भी ज्यादा ज्वालामुखी हो सकते हैं. यह इसे सौरमंडल में अब तक का सबसे ज्यादा ज्वालामुखी वाला ग्रह बनाता है. 

लावा से बना ग्रह 

शुक्र की सतह का लगभग 90% हिस्सा बेसाल्टिक लावा से बना है और लगभग 65% हिस्सा ज्वालामुखी मैदानों से ढका है. यह इस बात का संकेत है कि पूरे ग्रहों को आकार देने में ज्वालामुखी गतिविधियों ने एक बड़ी भूमिका निभाई है. 

काफी ज्यादा गर्मी 

शुक्र ग्रह सबसे गर्म ग्रह भी है. इसकी सतह का औसत तापमान लगभग 462 डिग्री सेल्सियस है. यह भीषण गर्मी सीसे को पिघलाने के लिए काफी है. इससे हमारे जाने पहचाने रूप में जीवन का होना असंभव हो जाता है और यह इसकी हाइली ज्वालामुखी प्रकृति में भी योगदान देता है 

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के विनस एक्सप्रेस मिशन से मिले डेटा के मुताबिक इनमें से कुछ ज्वालामुखी आज भी सक्रिय हो सकते हैं. अगर इसकी पुष्टि हो जाती है तो इसका मतलब यह होगा कि शुक्र सिर्फ ऐतिहासिक रूप से ही ज्वालामुखी वाला ग्रह नहीं है. बल्कि भू वैज्ञानिक रूप से आज भी जीवित है. हालांकि शुक्र पर सबसे ज्यादा ज्वालामुखी हैं लेकिन सौरमंडल का सबसे बड़ा ज्वालामुखी ओलंपस मॉन्स मंगल ग्रह पर स्थित है. वहीं बृहस्पति के चंद्रमा 'आयो' के नाम सबसे ज्यादा सक्रिय ज्वालामुखी वाला खगोलीय पिंड होने का खिताब है. यहां  लगभग 400 ज्वालामुखी लगातार फटते रहते हैं.

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