मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच दुनिया की नजर एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टिकी है. ईरान की ओर से इस अहम समुद्री रास्ते को बंद करने के ऐलान और उसके बाद अमेरिका की सैन्य कार्रवाई ने हालात को और गंभीर बना दिया है. यह वही जलडमरूमध्य है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस गुजरता है. ऐसे में अगर यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है तो इसका असर सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऊर्जा और व्यापार का संकट खड़ा हो सकता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद हो हुआ तो किन देशों में आने-जाने के रास्ते बंद हो जाएंगे. क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है ये इतना अहम? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर्शियन गल्फ को गल्फ ऑफ ओमान और आगे अरब सागर से जोड़ता है. यह समुद्री रास्ता भले ही चौड़ाई में सीमित है, लेकिन रणनीतिक रूप से बहुत अहम माना जाता है. वैश्विक स्तर पर होने वाले समुद्री व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी के चौक पॉइंट से गुजरता है और होर्मुज उनमें सबसे संवेदनशील जगह में शामिल है. हर दिन बड़ी मात्रा में तेल और गैस के टैंकर इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट सीधे वैश्विक चैन सप्लाई को प्रभावित करती है. ये भी पढ़ें-किन-किन देशों से हथियार खरीदता है अफगानिस्तान, क्या वह पाकिस्तान पर पड़ सकता है भारी?

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इन खाड़ी देशों की लाइफलाइन है यह रास्ता पर्शियन गल्फ से जुड़े कई देश के लिए समुद्री व्यापार का मुख्य रास्ता यही जलडमरूमध्य है. इनमें ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान जैसे देश शामिल है. इनमें से कई देशों के पास खुले समुद्र तक पहुंचने का यही प्रमुख मार्ग है. अगर यह रास्ता पूरी तरह बंद होता है तो इन देशों से तेल और गैस का निर्यात रुक सकता है, जिससे उनकी आर्थिक व्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा. भारत और चीन पर भी पड़ेगा असर भारत अपनी ऊर्जा जरूरत के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है. कच्चे तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है. ऐसे में अगर होर्मुज पूरी तरह बंद होता है तो भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में तेजी आ सकती है. इसके साथ ही महंगाई बढ़ने, रुपये पर दबाव आने और चालू खाता घाटा बढ़ने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती है. वहीं चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है और उसके तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. अगर यह रास्ता बंद होता है, तो चीन को वैकल्पिक सप्लाई ढूंढनी पड़ेगी, जिससे लागत बढ़ेगी और उसके मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर असर पड़ सकता है. जापान और दक्षिण कोरिया पर भी असर जापान अपनी ऊर्जा जरूरत के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है और उसका बड़ा हिस्सा होर्मुज के रास्ते से आता है. इसी तरह दक्षिण कोरिया भी खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है. ऐसे इस रास्ते के पूरी तरह बंद होने से इन देशों में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है, जिससे इंडस्ट्री और टेक सेक्टर पर सीधा असर पड़ेगा.

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