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किन-किन देशों के पास है खुद का अपना ब्राउजर, क्या जोहो की तरह चीन और पाकिस्तान ने भी बनाया है ऐसा सिस्टम?

कविता गाडरी   |  प्रांजुल श्रीवास्तव  |  23 Sep 2025 06:37 PM (IST)

जोहो एक भारतीय कंपनी है, जो डॉक्यूमेंट, स्प्रेडशीट और प्रेजेंटेशन जैसे टूल उपलब्ध कराती है. अश्विनी वैष्णव का यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वदेशी अपील के अनुरूप माना जा रहा है.

किन-किन देशों के पास है खुद का अपना ब्राउजर, क्या जोहो की तरह चीन और पाकिस्तान ने भी बनाया है ऐसा सिस्टम?

जोहो वेब ब्राउजर

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में ऐलान किया है कि वह अपने आधिकारिक कामकाज के लिए जोहो का इस्तेमाल करेंगे. जोहो एक भारतीय कंपनी है, जो डॉक्यूमेंट, स्प्रेडशीट और प्रेजेंटेशन जैसे टूल उपलब्ध कराती है. अश्विनी वैष्णव का यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वदेशी अपील के अनुरूप माना जा रहा है.

भारत ही नहीं, इस समय दुनियाभर के कई बड़े देश अपने-अपने स्वदेशी वेब ब्राउजर और डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित कर रहे हैं, जिससे डाटा सुरक्षित बना रहे और आत्मनिर्भरता को मजबूत किया जा सके. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि किन-किन देशों के पास अपना खुद का वेब ब्राउजर है और क्या जोहो की तरह चीन, अमेरिका और पाकिस्तान ने भी ऐसा कोई सिस्टम बनाया है या नहीं. अमेरिका के पास है वेब ब्राउजर का मार्केट ब्राउजर की दुनिया की सबसे बड़ी ताकत अमेरिकी कंपनियां ही हैं. Google Chrome, Apple Safari, Microsoft Edge और Mozilla Firefox यह सभी अमेरिकी कंपनियों के प्रोडक्ट हैं. इनका व‍िश्‍व स्‍तर पर मार्केट शेयर सबसे ज्यादा है. भारत में भी सबसे ज्यादा इन्हीं का इस्तेमाल होता है, लेकिन इसका सबसे बड़ा खतरा प्राइवेसी को लेकर होता है क्योंकि इन ब्राउजर के सर्वर बाहर हैं.   चीन का अपना ब्राउजर सिस्टम

चीन इंटरनेट और ब्राउजर दोनों ही मामलों में पहले से ही आत्मनिर्भर है. चीन के लोग Huawei Browser, UC Browser, QQ Browser और Sogou Explorer जैसे स्वदेशी ब्राउजर का इस्तेमाल करते हैं. चीन ने अपने नागरिकों की इंटरनेट गतिविधियों पर नजर रखने और विदेशी कंपनियों के प्रभाव को कम करने के लिए खुद का पूरा इकोसिस्टम तैयार किया है. इसके अलावा चीन की सरकार ऐसा कंटेंट जो प्राइवेसी के लिए खतरा हो उसे ब्लॉक करने के लिए लगातार कड़े नियम भी बनाते रही है. रूस और कोरिया के भी अपने ब्राउजर रूस का Yandex Browser और Sputnik है, वहीं दक्षिण कोरिया का Naver Whale ब्राउजर उपलब्ध है. यह देश अपने लेवल पर विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं. यह ब्राउजर आमतौर पर गूगल क्रोम जैसे ओपन सोर्स प्लेटफार्म पर आधारित होते हैं, लेकिन इन्हें अपने देश की जरूरत और नियमों के हिसाब से कस्टमाइज किया गया है. पाकिस्तान में विदेशी ब्राउजर का दबदबा  पाकिस्तान का अपना अभी तक कोई वेब ब्राउजर नहीं है. पाकिस्तान के लोग ज्यादातर Google Chrome, UC ब्राउजर और Opera जैसे विदेशी ब्राउजर इस्तेमाल करते हैं. हालांकि पाकिस्तान ब्राउजर 4G नाम का एक ऐप पाकिस्तान में हैं. यह ऐप अलग-अलग विदेशी ब्राउजर और वीपीएन सुविधाओं को एक जगह इकट्ठा करता है.

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Published at: 23 Sep 2025 06:37 PM (IST)
Tags:Google Chromeweb browserUSA ZOHOINDIA
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