ईरान में इस वक्त हालात तनावपूर्णं बने हुए हैं. अमेरिका की फौजें उसके करीब जाकर खड़ी हो गई हैं, ऐसे में ईरान की मिसाइल सिटी चर्चा में, जिसे तेल के इस देश ने पिछले कई सालों में जमीन के नीचे बड़े पैमाने पर तैयार किया है. ये कोई साधारण बंकर नहीं, बल्कि पहाड़ों के अंदर बने लंबी सुरंगों वाले सैन्य ठिकाने हैं. इनका मकसद युद्ध की स्थिति में मिसाइलों को सुरक्षित रखना और जवाबी हमला करने की क्षमता बनाए रखना है. सैटेलाइट तस्वीरों और आधिकारिक वीडियो के आधार पर इनके आकार और ताकत का अंदाजा लगाया गया है, आइए समझें. 

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क्या हैं ईरान की मिसाइल सिटी?

ईरान की मिसाइल सिटी दरअसल भूमिगत सैन्य ठिकाने हैं, जहां बैलिस्टिक मिसाइलें, लॉन्चर और सैन्य उपकरण रखे जाते हैं. ईरान ने इनके पूरे नक्शे या सही लोकेशन सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन सरकारी मीडिया में जारी वीडियो, सैटेलाइट तस्वीरों और रक्षा विशेषज्ञों की रिपोर्ट से पता चलता है कि ये ठिकाने पहाड़ों के अंदर गहरी सुरंगों में बने हुए हैं. 

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यह कोई एक कमरा या सीधी सुरंग नहीं है, बल्कि कई किलोमीटर लंबे नेटवर्क का हिस्सा होती हैं. ये सुरंगें इतनी चौड़ी बताई जाती हैं कि बड़े ट्रक और मोबाइल मिसाइल लॉन्चर अंदर चल सकें. कुछ वीडियो में ऊंचाई 30 से 50 फीट तक दिखाई गई है, ताकि लंबी दूरी की मिसाइलों को खड़ा रखा जा सके. 

कहां-कहां होने का है दावा?

ईरान का दावा है कि उसके ज्यादातर प्रांतों में ऐसे भूमिगत ठिकाने मौजूद हैं. खबर है कि फारस की खाड़ी के तटीय इलाकों में पहाड़ों के नीचे सुरंगें बनाई गई हैं, जहां से समुद्री लक्ष्यों पर मिसाइल दागी जा सकती है. पश्चिमी ईरान के पहाड़ी इलाकों में भी ऐसे ठिकानों की बात सामने आई है. वहीं मध्य ईरान के सेमनान और नतेंज जैसे इलाकों में जमीन के नीचे सैन्य और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ढांचे होने की जानकारी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में मिलती है. नतेंज क्षेत्र पहले से परमाणु कार्यक्रम के कारण चर्चा में रहा है. वहां भूमिगत निर्माण की पुष्टि अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों की रिपोर्टों में भी होती रही है. 

कितनी गहराई पर बने हैं?

मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि कुछ सुरंगें जमीन से सैकड़ों मीटर नीचे तक हो सकती हैं. कई रिपोर्टों में 300 से 500 मीटर तक की गहराई का अनुमान लगाया गया है. इतनी गहराई पर बने ठिकानों को साधारण बमों से नष्ट करना कठिन माना जाता है. ईरान का कहना है कि इन सुरंगों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि अगर एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाए, तो दूसरा हिस्सा काम करता रहे. इस तरीके को कंपार्टमेंटलाइजेशन कहा जाता है. यानी पूरा ढांचा एक साथ खत्म न हो सके. 

क्या इन पर परमाणु बम का असर नहीं होता?

किसी भी देश ने आधिकारिक रूप से यह नहीं कहा है कि कोई ठिकाना पूरी तरह परमाणु हमले से सुरक्षित है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि पहाड़ों के अंदर गहराई में बने ढांचे पर हमला करना बेहद कठिन होता है. मोटी चट्टानें विस्फोट की ऊर्जा को काफी हद तक रोक सकती हैं. 

हालांकि आधुनिक बंकर बस्टर बम गहराई तक मार कर सकते हैं, लेकिन बहुत गहरे और मजबूत ढांचे को पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं होता है. परमाणु हथियार का असर उसके प्रकार, शक्ति और विस्फोट की जगह पर निर्भर करता है. इसलिए यह कहना कि कोई ठिकाना पूरी तरह सुरक्षित है, तकनीकी रूप से सही नहीं है, लेकिन गहराई और पहाड़ी ढांचा सुरक्षा बढ़ा देता है. 

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