IMEC Corridor: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में रोम में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मिले. यहां दोनों देशों ने इंडिया मिडल ईस्ट यूरोप इकोनामिक कॉरिडोर पर सहयोग को और मजबूत करने का फैसला किया. इस मुलाकात के दौरान भारत और इटली ने अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया. इसमें व्यापार, कनेक्टिविटी, रक्षा और आधुनिक तकनीक पर खास जोर दिया गया. इस कदम को अब चीन के लिए एक बड़ी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है. ऐसा इसलिए है क्योंकि आईएमईसी तेजी से चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के विकल्प के रूप में उभर रहा है.
आईएमईसी को चीन के बीआरआई के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा
आईएमईसी कॉरिडोर को एक बड़े व्यापार और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था. यह बंदरगाह, रेलवे, शिपिंग मार्ग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए भारत, मिडल ईस्ट और यूरोप को आपस में जोड़ता है.
भारत ने इस कॉरिडोर को चीन की बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव के एक पारदर्शी और भरोसेमंद विकल्प तौर पर बढ़ावा दिया है. बीते कुछ सालों में कई देशों ने बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव के कुछ प्रोजेक्ट से जुड़े कर्ज के जोखिम और चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई है. इसी वजह से आईएमईसी को मिल रहे बढ़ते समर्थन को चीन की वैश्विक व्यापार की महत्वाकांक्षाओं के लिए एक सीधी भू राजनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है.
चीन के लिए एक बड़ा झटका
इस पूरे घटनाक्रम में इटली की भूमिका को काफी जरूरी माना जा रहा है. साल 2019 में इटली G7 देश में अकेला ऐसा देश बना जिसने आधिकारिक तौर पर चीन की बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव में हिस्सा लिया था. हालांकि प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने बाद में इस प्रोजेक्ट से खुद को अलग कर लिया. इसी के साथ भारत के साथ-साथ पश्चिमी देशों के समर्थन वाली कनेक्टिविटी पहलों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करना भी शुरू कर दिया. अब इटली आईएमईसी के जरिए भारत और मिडिल ईस्ट से आने वाले सामान के लिए यूरोप का मुख्य भूमध्यसागरीय प्रवेश द्वार बनना चाहता है. इस बदलाव को बीजिंग के लिए एक बड़ी कूटनीतिक हार के तौर पर देखा जा रहा है.
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भारत यूरोप व्यापार
आईएमईसी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे परिवहन में लगने वाला समय और लॉजिस्टिक्स की लागत कम होने की उम्मीद है. इस प्रोजेक्ट से जुड़े अनुमानों के मुताबिक यह कॉरिडोर भारत और यूरोप के बीच व्यापार में लगने वाले समय को लगभग 40% तक कम कर सकता है. इसी के साथ लॉजिस्टिक्स की लागत में भी 30% तक की कमी आ सकती है. इससे एशिया और यूरोप को जोड़ने वाले व्यापार मार्ग ज्यादा तेज और सस्ते हो जाएंगे.
चीन इस साझेदारी पर इतनी बारीकी से नजर क्यों रख रहा है?
चीन के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि आईएमईसी धीरे-धीरे यूरोप और मिडिल ईस्ट में बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव के प्रभाव को कम कर सकता है. इटली का समर्थन इस परियोजना को यूरोप के अंदर रणनीतिक महत्व देता है. इसी के साथ भारत की केंद्रीय भूमिका एशिया और यूरोप को जोड़ने वाले एक प्रमुख भविष्य के व्यापार केंद्र के रूप में इसकी स्थिति को और भी मजबूत करती है.
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