Video Without Permission Law: स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के दौर में वीडियो रिकॉर्ड करना काफी आसान हो गया है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर रिकॉर्डिंग कानूनी रूप से सही है. किसी की चुपके से फिल्म बनाना अपराध है या फिर नहीं है इस बात पर निर्भर करता है की रिकॉर्डिंग कहां की गई है, क्या रिकॉर्ड किया गया है, क्या सहमति ली गई थी और बाद में वीडियो का इस्तेमाल या फिर उसे शेयर कैसे किया गया. भारतीय कानून में वॉयरिज्म, निजता का उल्लंघन, अश्लील या फिर यौन रूप से स्पष्ट कंटेंट, मानहानि और ब्लैकमेल के खिलाफ खास सुरक्षा दी गई है. 

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चुपके से रिकॉर्डिंग करने पर जेल 

बीएनएस की धारा 77 खास तौर पर वॉयरिज्म से जुड़ी हुई है. इसे तब लागू किया जाता है जब कोई व्यक्ति किसी महिला की ऐसी स्थिति में तस्वीर देखता, लेता या फिर फैलाता है जब वह निजी काम कर रही हो और उसे निजता की उम्मीद हो. इसमें शरीर के निजी अंगों का दिखना, टॉयलेट का इस्तेमाल करना या फिर ऐसी यौन गतिविधि करना शामिल है जो आमतौर पर सार्वजनिक रूप से नहीं की जाती है. 

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पहली बार दोषी पाए जाने पर कम से कम 1 साल और ज्यादा से ज्यादा 3 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है. दूसरी या फिर उसके बाद दोषी पाए जाने पर तीन से 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है. जरूरी बात यह है कि अगर कोई महिला रिकॉर्डिंग के लिए सहमत थी लेकिन वीडियो को दूसरों के साथ शेयर करने के लिए सहमत नहीं थी तो भी उसे फैलाना धारा 77 के तहत अपराध माना जा सकता है. 

आईटी एक्ट के तहत भी निजता की सुरक्षा मिलती है 

इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 की धारा  66E निजता के उल्लंघन से संबंधित है. यह जानबूझकर या फिर जानकारी के साथ किसी व्यक्ति के निजी अंगों की तस्वीर लेने, पब्लिश करने या फिर भेजने पर रोक लगाती है. अगर ऐसा करने से उनकी निजता का उल्लंघन होता है. यह प्रावधान पुरुषों और महिलाओं दोनों पर ही लागू होता है. 

इसमें 3 साल तक की जेल ₹2,00,000 तक का जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं. कानून खासतौर पर उन स्थितियों को कवर करता है जहां पर किसी व्यक्ति को यह उम्मीद होती है कि उसके शरीर के निजी अंगों को रिकॉर्ड नहीं किया जाएगा या फिर दूसरों को नहीं दिखाया जाएगा. 

अश्लील वीडियो शेयर करने पर अतिरिक्त आरोप 

जब रिकॉर्ड क्या-क्या वीडियो ऑनलाइन अपलोड या फिर शेयर किया जाता है तो कानूनी नतीजे और भी गंभीर हो सकते हैं. आईटी एक्ट की धारा 67 और 67A, इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री और यौन गतिविधि वाली सामग्री को पब्लिश करने या भेजने से संबंधित हैं. 

सामग्री की प्रकृति और परिस्थिति के आधार पर इन प्रावधानों के तहत जेल की सजा और भारी जुर्माना हो सकता है. इस वजह से व्हाट्सएप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम या फिर किसी भी दूसरे प्लेटफार्म पर कोई निजी या फिर अंतरंग वीडियो फॉरवर्ड करना सिर्फ भेजने वाले और पाने वाले के बीच का मामला नहीं है. 

साथ ही अगर किसी व्यक्ति की रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल उन्हें धमकाने या फिर उनसे जबरन वसूली करने के लिए किया जाता है तो मामला और भी गंभीर बन जाता है. भारतीय न्याय संहिता की धारा 308 के तहत जबरन वसूली में जानबूझकर किसी को चोट पहुंचाने का डर दिखाना और बेईमानी से उन्हें संपत्ति या फिर मूल्यवान सिक्योरिटी देने के लिए मजबूर करना शामिल है. इस अपराध के लिए 7 साल तक की जेल, जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं. 

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क्या सार्वजनिक स्थान पर किसी की रिकॉर्डिंग करना गैर-कानूनी होता है?

सड़क, बाजार, रेलवे स्टेशन या फिर सार्वजनिक कार्यक्रमों जैसी जगहों पर लोगों की रिकॉर्डिंग करना सिर्फ इस वजह से अपराधिक अपराध नहीं माना जाता क्योंकि उस व्यक्ति ने अनुमति नहीं दी है. पत्रकार, व्लॉगर और आम लोग ऐसे दृश्य रिकॉर्ड कर सकते हैं जिनमें कुछ लोग दिखाई दे सकते हैं. 

हालांकि परिस्थितियां मायने रखती हैं. किसी का पीछा करने, धमकाने, परेशान करने या फिर यौन शोषण करने के इरादे से की गई लक्षित रिकॉर्डिंग कानूनी समस्या पैदा कर सकती है. इस वजह से सार्वजनिक दृश्य को रिकॉर्ड करने और गैर-कानूनी उद्देश्यों के लिए जानबूझकर किसी व्यक्ति को लक्षित करने के बीच का अंतर काफी जरूरी है.

डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटक्शन एक्ट 2023 भी डिजिटल पर्सनल डेटा की प्रोसेसिंग के लिए एक बड़ा ढांचा तैयार करता है. इसमें सहमति और कुछ वैध उपयोग शामिल हैं. हालांकि इसका लागू होना परिस्थितियों और लागू प्रासंगिक प्रावधानों पर निर्भर करता है.

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