जापान की तरक्की और वहां के काम करने के सलीके की पूरी दुनिया दीवानी है. आखिर ऐसा क्या है जो जापानी कंपनियों को हर संकट से बाहर निकाल लेता है? इसका जवाब छुपा है उनकी दो खास तकनीकों में, जिन्हें '5 Whys' और '5S' कहा जाता है. ये तरीके किसी भी काम को करने का नजरिया बदल देते हैं. मुश्किल से मुश्किल चुनौतियों को सुलझाने और कार्यस्थल को एकदम परफेक्ट बनाने के लिए जापानी लोग इन आसान और असरदार तकनीकों का सहारा लेते हैं. आइए इनके पीछे के विज्ञान को गहराई से समझते हैं.

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कहां से हुई इस तकनीक की शुरुआत?

जापान में किसी भी परेशानी को सतह पर देखने के बजाय उसकी गहराई में जाने की पुरानी परंपरा रही है. इसी सोच के साथ टोयोटा कंपनी के संस्थापक साकिची टोयोडा ने '5 Whys' यानी 5 बार 'क्यों' पूछने की बेहतरीन तकनीक को तैयार किया था. इस अनोखे फॉर्मूले का मुख्य मकसद सिर्फ ऊपर से दिखने वाली कमियों को ठीक करना नहीं है. इसका असली काम समस्या की मूल जड़ तक पहुंचना है, ताकि गड़बड़ी को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके.

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कैसे काम करता है नियम?

मान लीजिए कि किसी फैक्ट्री में काम करते समय अचानक एक बड़ी मशीन बंद हो जाती है. पहली बार क्यों पूछने पर पता चला कि ओवरलोड होने की वजह से मशीन का फ्यूज उड़ गया. दूसरी बार क्यों पूछने पर सामने आया कि मशीन ओवरलोड इसलिए हुई क्योंकि उसके बेयरिंग में जरूरी लुब्रिकेशन यानी तेल नहीं था. तीसरी बार क्यों पूछने पर जवाब मिला कि लुब्रिकेशन पंप ठीक से काम नहीं कर रहा था.

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समस्या की जड़ तक पहुंचना

चौथी बार क्यों पूछने पर असलियत सामने आई कि पंप की शाफ्ट पूरी तरह घिस चुकी थी. जब पांचवीं और आखिरी बार क्यों पूछा गया, तो असली वजह मिली कि पंप में कोई फिल्टर नहीं लगा था, जिससे उसमें कचरा चला गया. इस तरह महज 5 सवालों में यह साफ हो गया कि असली खराबी फ्यूज उड़ने की नहीं थी, बल्कि मशीन में फिल्टर का न होना असली समस्या थी.

5 Whys के फायदे ही फायदे

इस सीधे और सरल तरीके को अपनाने से कई बड़े फायदे होते हैं. सबसे पहली बात यह है कि इससे किसी भी गड़बड़ी का स्थायी समाधान मिल जाता है और वह दिक्कत भविष्य में दोबारा कभी सामने नहीं आती. इसके साथ ही बार-बार होने वाले नुकसान से मुक्ति मिलती है, जिससे समय और धन दोनों की भारी बचत होती है. इससे टीम की पूरी कार्यप्रणाली वैज्ञानिक और तार्किक बनती है और मनमुटाव दूर होते हैं.

कार्यस्थल का संगठन

समस्याओं को सुलझाने के साथ-साथ जापान में काम की जगह को व्यवस्थित रखने के लिए '5S' कार्यप्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है. यह उत्पादकता बढ़ाने का एक बहुत ही शानदार जापानी तरीका है. इसका मुख्य लक्ष्य अपने काम करने के दायरे को पूरी तरह सुरक्षित, व्यवस्थित और गलतियों से मुक्त बनाना है. इस पूरी प्रक्रिया को जापानी भाषा के 5 विशेष शब्दों के आधार पर अलग-अलग चरणों में बांटा गया है.

जरूरी और गैर-जरूरी

इस पद्धति का पहला चरण है 'सीरी' जिसका सीधा सा मतलब सॉर्ट करना यानी गैर-जरूरी चीजों को काम की जगह से तुरंत बाहर करना है. इसके बाद दूसरा चरण आता है 'सीटॉन' जिसका अर्थ है हर चीज को एक नियत और सही जगह पर करीने से व्यवस्थित करके रखना. तीसरे चरण 'सीसो' के तहत पूरे कार्यस्थल की नियमित साफ-सफाई की जाती है और साथ ही सभी उपकरणों का अच्छे से निरीक्षण भी किया जाता है.

अनुशासन का महत्व

चौथा चरण 'सीकेत्सु' है, जो पहले के तीनों चरणों को हर दिन बनाए रखने के लिए कड़े मानक और नियम तय करता है. इसके बाद आखिरी और पांचवां चरण आता है 'शित्सुके', जिसका अर्थ है पूरे अनुशासन के साथ इन सभी नियमों का हमेशा पालन करना. जब ये दोनों तकनीकें एक साथ मिलती हैं, तो किसी भी दफ्तर या कारखाने की पूरी सूरत बदल जाती है और काम का स्तर कई गुना बढ़ जाता है.

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