मसल मेमोरी शब्द अक्सर हम लोग सुनते तो हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों को नहीं पता कि इसका असली संबंध मांसपेशियों से नहीं बल्कि दिमाग से है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक साइकिल चलाना, टाइपिंग करना या जूतों के फीते बांधना जैसे काम बिना सोचे समझे इसी मसल मेमोरी की वजह से होते हैं. आइए जानते हैं यह प्रोसेस असल में काम कैसे करती है, और सामान्य याददाश्त से यह कितनी अलग है.
मसल मेमोरी क्या होती है
मसल मेमोरी दरअसल उन कामों और स्किल्स से जुड़ी होती है, जिन्हें हम बिना ज्यादा सोचे समझे अपने आप कर लेते हैं. जब कोई काम बार बार दोहराया जाए, तो उसे करने के लिए धीरे धीरे कम सोचने की जरूरत पड़ती है, और यही रिपीटेशन आगे चलकर मसल मेमोरी बनाती है. साइकिल चलाना, गाड़ी चलाना या टाइपिंग जैसे काम इसकी सबसे आम मिसालें हैं.
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क्या मांसपेशियों में सच में याददाश्त होती है
हालांकि नाम में मसल शब्द जरूर आता है, लेकिन असल याददाश्त मांसपेशियों में नहीं, बल्कि दिमाग में ही जमा होती है. इस पूरी प्रोसेस को प्रोसीजरल मेमोरी कहा जाता है, जिसमें दिमाग के साथ साथ मांसपेशियां भी शामिल होती हैं. यानी मांसपेशियां खुद कुछ याद नहीं रखतीं हैं, बल्कि दिमाग ही उस मूवमेंट को इतनी बार प्रैक्टिस करा देता है कि वह ऑटोमैटिक बन जाती है.
मेमोरी कितनी अलग है
आम याददाश्त जैसे किसी का बर्थडे याद रखना या कोई बात याद करना, इसमें दिमाग को हर बार सोचना और जानकारी को याद करके निकालना पड़ता है. लेकिन मसल मेमोरी में ऐसा नहीं होता है. एक बार स्किल सीख लेने के बाद दिमाग को हर बार नए सिरे से सोचने की जरूरत नहीं पड़ती है, क्योंकि वह मूवमेंट लगभग खुद ब खुद हो जाता है. यही वजह है कि इसे बाकी तरह की याददाश्त से अलग माना जाता है.
क्यों फायदेमंद है यह प्रोसेस
मसल मेमोरी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह दिमाग को बार बार सोचने और मेहनत करने से बचाती है. जब कोई रोजमर्रा का काम ऑटोमैटिक हो जाता है, तो दिमाग उस एनर्जी को दूसरे जरूरी कामों में लगा पाता है. यही वजह है कि लंबे समय तक प्रैक्टिस करने वाले लोग किसी स्किल को बिना ज्यादा सोचे परफेक्ट तरीके से कर लेते हैं.
कैसे बनती है मसल मेमोरी
मसल मेमोरी बनने में सबसे बड़ा रोल रिपीटेशन और प्रैक्टिस का होता है. जब किसी मूवमेंट या काम को बार बार दोहराया जाता है, तो दिमाग और मांसपेशियों के बीच एक तालमेल बन जाता है, जिससे वह काम धीरे धीरे ऑटोमैटिक होता जाता है. यही वजह है कि खिलाड़ी, म्यूजिशियन और डांसर जैसे लोग लगातार प्रैक्टिस करके अपनी स्किल्स को इतना परफेक्ट बना लेते हैं कि वह लगभग बिना सोचे ही हो जाती हैं.
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