हाल ही में 33 साल के स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन का श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टेस्ट टीम में चयन हुआ है, जिसने क्रिकेट फैंस के बीच एक दिलचस्प सवाल खड़ा कर दिया है. क्या भारतीय क्रिकेट टीम में चुने जाने के लिए कोई अधिकतम उम्र सीमा होती है. सारांश जैन का यह चयन उनके लंबे संघर्ष का नतीजा है, और यह मामला साबित करता है कि अगर फॉर्म और फिटनेस साथ दे तो उम्र सिर्फ एक नंबर है. आइए जानते हैं कि आखिर भारतीय क्रिकेट टीम में सिलेक्शन को लेकर उम्र से जुड़े क्या नियम हैं.

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क्या है बीसीसीआई का नियम

BCCI ने हाल ही में अपने उम्र वेरिफिकेशन प्रोग्राम में बड़े बदलाव किए हैं, ताकि क्रिकेट में उम्र से जुड़ी धोखाधड़ी पर लगाम लगाई जा सके. नई नीति के तहत अगर किसी खिलाड़ी की बोन टेस्ट यानी हड्डियों की जांच में उम्र तय सीमा से ज्यादा पाई जाती है, तो उसे दूसरा बोन टेस्ट कराने की अनुमति दी जाएगी. यह नियम अब 12 से 15 साल की उम्र वर्ग की लड़कियों पर भी लागू किया जाएगा, ताकि महिला क्रिकेट में भी पारदर्शिता बनी रहे. हालांकि यह नियम मुख्य रूप से जूनियर और आयु-वर्ग क्रिकेट के लिए है, ताकि सही उम्र के खिलाड़ी ही उस कैटेगरी में खेलें.

न्यूनतम उम्र को लेकर क्या हैं नियम

जहां अधिकतम उम्र की कोई सीमा नहीं है, वहीं न्यूनतम उम्र को लेकर ICC का एक साफ नियम मौजूद है. 2020 में लागू हुए इस नियम के मुताबिक, किसी भी खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए कम से कम 15 साल का होना जरूरी है. यही वजह है कि कम उम्र में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी सीनियर टीम में जगह पाने के लिए इस न्यूनतम उम्र सीमा को पार करना होता है.

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क्या सीनियर टीम के लिए है कोई अधिकतम उम्र सीमा

BCCI की तरफ से सीनियर पुरुष या महिला क्रिकेट टीम में चुने जाने के लिए किसी तरह की अधिकतम उम्र सीमा तय नहीं की गई है. यानी अगर कोई खिलाड़ी फिटनेस टेस्ट पास करता है और क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करता है, तो उसकी उम्र चाहे 30 हो या 35, उसे टीम इंडिया में जगह मिल सकती है. सारांश जैन के अलावा भी क्रिकेट इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं, जहां खिलाड़ियों ने 30 की उम्र पार करने के बाद भारतीय टीम में डेब्यू किया.

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सारांश जैन का उदाहरण क्यों है खास

सारांश जैन को श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया, जो उनके करियर का पहला मौका है. कोलंबो में उन्होंने 33 साल की उम्र में अपना टेस्ट डेब्यू किया. इससे पहले श्रीलंका दौरे पर इंडिया ए की तरफ से खेलते हुए उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी दावेदारी मजबूत की थी. सारांश का मानना है कि आज के दौर में फिटनेस और फील्डिंग का स्तर काफी ऊंचा हो चुका है, इसलिए उम्र अब खिलाड़ियों के प्रदर्शन में उतनी बड़ी रुकावट नहीं रह गई. उनका यह चयन दिखाता है कि सीनियर टीम में जगह पाने के लिए उम्र से ज्यादा फॉर्म और फिटनेस मायने रखती है.

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