British Loot: न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की कोहिनूर हीरा लौटाने के बारे में हाल की टिप्पणी ने ब्रिटिश लूट पर एक वैश्विक बहस को फिर से जगा दिया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अंग्रेजों के पास भारत की कौन-कौन सी चीजें हैं और वे भारत से क्या लूट कर गए थे.

भारत से भारी आर्थिक निकासी 

अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक के मुताबिक ब्रिटेन ने 1765 और 1938 के बीच भारत से लगभग 45 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति निकाल ली थी. यह सिर्फ भौतिक वस्तुओं के बारे में नहीं था. इसमें टैक्स, व्यापार और कच्चे माल का व्यवस्थित शोषण शामिल था. इसने पीढ़ियों तक भारत की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया.

कोहिनूर और दूसरे अनमोल रत्न 

कोहिनूर हीरा इस विरासत का सबसे प्रसिद्ध प्रतीक बना हुआ है. गोलकोंडा की खदानों से निकला यह हीरा, एंग्लो-सिख युद्धों के बाद महारानी विक्टोरिया को सौंपे जाने से पहले एक समय मुगल शासकों की शोभा बढ़ाता था. एक और उल्लेखनीय कलाकृति शाहजहां का जेड वाइन कप है. यह मुगल शिल्प कौशल का एक शानदार नमूना है. यह न सिर्फ धन का बल्कि उस युग की कलात्मक प्रतिभा को भी दर्शाता है.

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लूटे गए हथियार और शाही सामान 

1799 में टीपू सुल्तान के पतन के बाद ब्रिटिश सेना ने उनकी कई चीजें जब्त कर ली थीं. इनमें उनकी तलवार और राम अंकित एक अंगूठी भी शामिल थी.  जहां तलवार बाद में नीलामियों के जरिए कई हाथों से गुजरी वहीं अंगूठी अभी भी एक ब्रिटिश संग्रह में रखी हुई है. इसी तरह महाराजा रणजीत सिंह का स्वर्ण सिंहासन वर्तमान में विक्टोरिया और अल्बर्ट संग्रहालय में रखा हुआ है. 

सांस्कृतिक और धार्मिक कलाकृतियां 

सबसे जरूरी सांस्कृतिक नुकसानों में अमरावती मार्बल्स शामिल हैं. ये कुछ प्राचीन बौद्ध मूर्तियां हैं जो दूसरी शताब्दी की हैं.  इन्हें औपनिवेशिक खुदाई के दौरान भारत से लंदन ले जाया गया था. एक और आइकॉनिक कलाकृति सुल्तानगंज बुद्ध है. यह एक विशाल कांस्य प्रतिमा है. यह बिहार में मिली थी, लेकिन बाद में इसे बर्मिंघम संग्रहालय भेज दिया गया.

भारत के प्राकृतिक संसाधनों का शोषण 

ब्रिटिशों ने सिर्फ कलाकृतियां ही नहीं लीं, बल्कि उन्होंने एक ऐसी आर्थिक व्यवस्था बनाई जो सिर्फ उन्हें ही लाभ पहुंचाने के लिए डिजाइन की गई थी. कपास, रेशम, मसाले और नील जैसे कच्चे माल भारत से काफी कम कीमत पर लिए जाते थे और ब्रिटेन में भारी मुनाफे पर बेचे जाते थे. 

इससे एक ऐसा सिस्टम बन गया जिसमें भारत की अपनी ही दौलत का इस्तेमाल उसी के खिलाफ किया गया. इससे एक तरफ तो अंग्रेजों के विस्तार को फंड मिला, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ गई.

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