Rifle License: उत्तर प्रदेश में राइफल लाइसेंस पाना का कोई आसान काम नहीं है. यह काफी सख्त नियमों वाला सिस्टम है. इसे मुख्य रूप से जिलाधिकारी के दफ्तर और केंद्र सरकार के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए चलाया जाता है. अगर आप सोच रहे हैं कि इसके लिए कहां अप्लाई करें या फिर यह प्रक्रिया कैसे काम करती है तो आइए जानते हैं इसके संबंध में पूरी जानकारी.

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यूपी में राइफल लाइसेंस के लिए कहां अप्लाई करें? 

उत्तर प्रदेश में हथियारों के लाइसेंस जारी करने का अधिकार संबंधित जिले के जिला अधिकारी के पास होता है. चाहे आप लखनऊ में हों, नोएडा में हों या फिर किसी और जिले में, जिलाधिकारी का दफ्तर ही आखिरी फैसला लेता है. इसी के साथ आवेदन गृह मंत्रालय के पोर्टल NDAL-ALIS के जरिए ऑनलाइन जमा किए जा सकते हैं. इससे यह प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और ट्रैक करने लायक हो जाती है. जो लोग पुराने तरीके से आवेदन करना पसंद करते हैं वे अभी भी कलेक्ट्रेट के हथियार अनुभाग में जाकर ऑफलाइन फॉर्म जमा कर सकते हैं.

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पात्रता और बुनियादी जरूरत 

आवेदन पर विचार किए जाने के लिए भी आवेदकों को पात्रता की सख्त शर्त पूरी करनी होगी. आपकी उम्र कम से कम 21 साल होनी चाहिए, आप भारत के नागरिकों हों, मानसिक रूप से स्वस्थ हों और आपका कोई गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड ना हो. लेकिन सिर्फ पात्रता ही काफी नहीं है, आपको यह भी बताना होगा कि आपको हथियार की जरूरत क्यों है. आमतौर पर इसके लिए मान्य कारणों में किसी गंभीर खतरे से अपनी सुरक्षा करना या फिर शूटिंग खेलों में हिस्सा लेना शामिल होता है. अगर कोई ठोस वजह ना हो तो लाइसेंस मिलने की संभावना काफी कम होती है. 

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लाइसेंस पाने की पूरी प्रक्रिया 

आवेदन जमा होने के बाद प्रक्रिया कई स्तरों की जांच से गुजरती है. आपको अपनी पहचान का प्रमाण, पते का प्रमाण और कुछ खास फॉर्म जैसे मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और सुरक्षित भंडारण की घोषणा जमा करने होंगे. इसके बाद स्थानीय पुलिस आपकी पृष्ठभूमि की पूरी जांच करती है. कई मामलों में प्रशासन आपको इंटरव्यू के लिए भी बुला सकता है. इन सभी चरणों को पार करने के बाद ही जिलाधिकारी यह फैसला करते हैं कि आपको लाइसेंस दिया जाएगा या फिर नहीं.

राइफल कहां और कैसे खरीदें? 

लाइसेंस मिलना तो सिर्फ आधा काम है. एक बार मंजूरी मिल जाने के बाद आप राइफल खरीद सकते हैं. लेकिन सिर्फ किसी अधिकृत हथियार डीलर से ही. राइफल खरीदते समय आपको अपना असली लाइसेंस दिखाना होगा. इसमें कोई भी शॉर्टकट या फिर छूट नहीं मिलती है. हथियार खरीदने के बाद उसे डीएम ऑफिस और स्थानीय पुलिस स्टेशन दोनों जगह पर आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड करवाना जरूरी है. आमतौर पर 30 दिनों के अंदर. 

कितना आएगा खर्च 

राइफल लाइसेंस के लिए अप्लाई करने में कुछ खर्च भी आता है. सरकारी एप्लीकेशन फीस आमतौर पर ₹2000 होती है. कुछ जिलों में अधिकारी सिक्योरिटी डिपाजिट की मांग कर सकते हैं. नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट के रूप में यह डिपॉजिट ₹30,000 तक हो सकता है.

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